जनाधार को साधने का प्रयास है बजट, फिर भी आसान नहीं होगी राह

नई दिल्ली: कृषि क्षेत्र और ग्रामीण इलाकों को केन्द्रीय बजट में मिले महत्व से एक बात साफ हो गई है कि केन्द्र सरकार गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन से परेशान है। चुनाव नतीजों से साफ है कि पार्टी की पकड़ ग्रामीण इलाकों में कमजोर पड़ी है। और जनाधार तेजी से गैर-भाजपा पार्टियों की ओर जा रहा है। यही वजह है कि 1 फरवरी को पेश किए गए वार्षिक बजट में केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ग्रामीण इलाकों को केन्द्र में रखते हुए किसानों और गरीबों के लिए बड़े ऐलान किए।

वित्त मंत्री ने किसानों की आमदनी को दोगुना करने और गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक की वार्षिक मुफ्त चिकित्सा देने का लक्ष्य रखा. किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लिए केन्द्र सरकार ने फसल की एमएसपी को डेढ़ गुना करने का ऐलान किया है। साथ ही गरीब परिवारों तक स्वास्थ सुविधा सुनिश्चित करने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थकेयर योजना ‘मोदीकेयर’ की घोषणा की। इन घोषणाओं के सहारे जहां सरकार की कोशिश लोकसभा चुनावों में गुजरात चुनावों की पुनरावृत्ति को रोकने की है। विपक्षी पार्टियों का दावा है कि भाजपा अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होगी। उनकी दलील है कि इन योजनाओं का फायदा किसानों और गरीबों तक पहुंचाने में समय लगेगा और तब तक बीजेपी 8 राज्यों और 2019 के शुरुआत में होने वाले आम चुनावों में नुकसान उठा चुकी होगी। महाराष्ट्र में शिवसेना ने भाजपा से अलग होने का दावा किया है। इसलिए इस राज्य में उसे निराशा का सामना करना पड़ेगा।

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि बजट से पहले आए आर्थिक सर्वे में सरकार ने 7.5 फीसदी विकास दर का सपना दिखाया है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को यह रफ्तार देने के उठाए जाने वाले उपायों पर केन्द्र सरकार ने चुप्पी साध रखी है। इससे भी निष्कर्ष यह है कि किसानों और जरीब जनता के साथ केन्द्र सरकार ने एक बार फिर झूठे वादे का सहारा लिया है जिससे वह 2019 के लोकसभा चुनावों में होने वाले नुकसान को रोक सके। केन्द्रीय बजट के मुताबिक केन्द्र सरकार ने ग्रामीण इलाकों पर 14.34 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रोजगार पैदा करने और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का मसौदा पेश किया है।

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