जब दंपत्ति ने बेटे की चाहत में कर दिया ऐसा काम, जान कर यकीन नहीं कर पाएंगे आप

नई दिल्ली: आज हमारा देश जब 21वीं सदी में पहुंच चुका है तो लोगों की सोच भी काफी बदल रही है। जात-पात, भेदभाव, लड़का-लड़की ऐसी तमाम तरह की सोच में भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में सरकार भी कई तरह की योजनाओं के जरिए बेटियों को बचाने का प्रयास कर रही है। जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से लेकर सुकन्या धन योजना तथा अन्य तमाम प्रयास कर रही है मगर बावजूद इसके कुछ ऐसे लोग आज भी मौजूद है जो बेटी के अपेक्षा बेटों को ही ज्यादा तवज्जो देते हैं।

बावजूद इसके कि आज के समय बेटियां हर क्षेत्र में आगे ही बढ़ते जा रही हैं और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। आज हम आपको ऐसा ही एक उदाहरण देने जा रहे है जो मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से देखने को मिला जहां दो परिवारों ने बेटे की चाहत में कुछ ऐसा कदम उठाया जिसके बारे में जान कर आप अपना सिर पकड़ लेंगे। पहला मामला है तो गंगूरीपूरा का जहां पर विनोद शर्मा नाम के एक युवक की पत्नी माया ने पुत्र प्राप्ति की चाहत में पुरे 10 बेटियों को जन्म दे दिया। इसके बाद भी इनकी इच्छा ख़त्म नही हुई तब जाकर 11वीं बार में भगवान ने इनकी सुन ली और उन्हें पुत्र प्राप्ति हुई।

सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि परिवार के मुखिया यानी विनोद टीवी रिपेयरिंग का काम करते हैं और पूरे परिवार में एकमात्र वही है जो कमाई करते हैं। अब आप सोच लीजिए इन 11 बच्चों का पालन-पोषण कितना बेहतर होगा और उनका भविष्य कैसा होगा। हालांकि यह एकमात्र ऐसा मामला नहीं है जब बेटे की चाहत में लोग कई हदों को पार कर जाते हैं। कुछ ऐसा ही मामला अंचल से भी सामने आया जहां एक दंपति ने बेटे की प्राप्ति के लिए सात बेटियों को जन्म दे दिया। मगर माथा पीटने वाली बात तब पता चली कि यह इच्छा दुसरे बेटे को पाने की थी।

जी हाँ, यह उनका पहला बेटा नहीं बल्कि दूसरा बेटा था जिसके लिए उन्होंने 7 और बेटियों को जन्म दे दिया था। राकेश गोस्वामी के परिवार में सबसे पहले बेटी का जन्म हुआ था और उसके बाद एक बेटे का जन्म हुआ जिसके साथ ही उनके परिवार पूर्ण हो गया था। मगर राकेश और उनकी पत्नी को एक और बेटा चाहिए था जिसकी ज़िद में उन्होंने छह और बेटियों को जन्म दे दिया। निश्चित रूप से सरकार भले ही कितनी सारी योजनाएं ला दे, कितनी ही जागरूकता फैला ले मगर इस तरह की सोच रखने वाले लोग और परिवार के आगे सारी व्यवस्था बेकार हो जाती हैं।

ऐसे में सिर्फ बेटियों का ही नहीं बल्कि बेटों का भी भविष्य अधर में पड़ जाता है, क्योंकि परिवार में कमाई का स्रोत सीमित रहता है और परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ते जाती है। नतीजा किसी को भी ना बेहतर शिक्षा मिल पाती है ना ही उनका भविष्य सुनहरा होता दिखता है।

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