जब नहीं था साबुन और सर्फ तो जाने कैसे चमकाए जाते थे राजा-रानियों के कपड़े

कभी आपने सोचा है, आज साबुन और पाउडर सब कुछ होने के बाद भी कपड़ों के दाग निकालना कितना मुश्किल है, लेकिन तब जब ना साबुन था ना सर्फ तब ये काम कैसे होता होगा । कैसे, महंगे और चमकदार वस्‍त्रों को धुला जाता होगा । कपड़ों से दाग निकालने के लिए किन चीजों का इस्‍तेमाल होता होगा । आगे बताते हैं आपको । क्‍या आप जानते हैं भारत में पहली बार साबुन कब आया, 189 में, इसे अंग्रेज भारत लेकर आए थे । पहले साबुन ब्रिटेन से आयात होते थे, फिर देश में ही इसकी फैक्ट्री खुल गई । लेकिन साबुन से पहले भारत में कपड़े कैसे धोते थे, आगे जानिए ।

1897 में लगाई गई पहली फैक्‍ट्री
ब्रिटिश इंडिया की भारत में लगाई ये फैक्ट्री नहाने और कपड़े साफ करने दोनों तरह के साबुन बनाती थी । नॉर्थ वेस्‍ट सोप नाम की ये कंपनी पहली ऐसी कंपनी थी जिसने 1897 में मेरठ में देश की पहली सोप फैक्‍ट्री खोली थी । ये कारोबार तब खूब फला फूला था । इसके बाद जमशेदजी टाटा ने इस कारोबार में पहली भारतीय कंपनी के तौर पर प्रवेश किया । लेकिन, साबुन से पहले क्‍या, इस सवाल का जवाब आगे है ।

रीठा का इस्तेमाल
ये तो पूरा विश्‍व जानता है कि भारत देश वनस्पति और खनिज संपन्न रहा है । देश में रीठा नाम का एक पेड़ होता है, इसका इस्‍तेमाल कपड़ों को धोने में किया जाता था । आज भी रीठा का इसतेमाल बालों को सुंदर बनाने में किया जाता है, तब कपड़ों को साफ करने के लिए रीठा का खूब इस्तेमाल होता था । महंगे रेशमी वस्त्रों को बैक्‍टीरिया फ्री करने और चमकाने में आज भी ऑर्गेनिक प्रोडक्ट के तौर पर रीठा का इस्‍तेमाल किया जाता है । रीठे का इस्तेमाल देश में सुपर सोप की तरह होता था, इसके छिलकों से झाग पैदा होता था । इसमें कपड़े साफ भी होते थे और उन पर चमक भी आ जाती थी । पुराने समय में भी रानियां अपने बड़े बालों को इसी से धोती थीं ।

गर्म पानी में उबाले जाते थे कपड़े
उस समय कपड़ों को गर्म पानी में डालकर फिर उन्‍हें कुछ ठंडा करके पत्थरों पर पीटा जाता था, जिससे उनकी गंदगी निकल जाती थी । भारत में आज भी कई धोबी घाट हैं जहां पारंपरिक तरीके से कपड़े धुले जाते हैं ।

चमकीले, मुलायम कपड़ों की धुलाई
लेकिन पत्‍थर पर पीटने का काम महंगे और मुलायम कपड़ों के साथ नहीं होता था । उनके लिए रीठा का इस्तेमाल होता था, पानी में रीठा के फल डालकर उसे गर्म किया जाता था । इससे पानी में झाग पैदा होता था, इसमें कपड़ों को डालकर हाथ या डंडे से उन्‍हें हिलाया जाता था ।

रेह का इस्‍तेमाल
रीठा के अलावा ‘रेह’का प्रयोग भी धुलाई में होता था, भारत की जमीन पर यह सफेद रंग का पाउडर बहुत मिलता था । इस पाउडर को पानी में मिलाकर कपड़ों को भिगो दिया जाता है, इसके बाद उसका लकड़ी की थापी या पेड़ों की जड़ों से रगड़कर साफ किया जाता था ।

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