जब फागुन रंग झमकते हों, तब देख बहारें होली की

गोरखपुर: जब दूल्हा राग बसंत हो तो बसंत और फागुन की फगुनाहट देखते ही बनती है। जब 28 से 80 तक तीन पीढ़ियां मंच पर हों और संचालक जुगानी काका हों तो फागुन में बाबा भी देवर लागे हैं जैसी उक्ति सही लगती है।’ होली का रंग अभी से दिखने लगा है। ऋतुराज बसंतोत्सव और रंग पर्व होली के अवसर पर रविवार को आकाशवाणी गोरखपुर एवं नेशनल एजुकेशन सोसाइटी गोरखपुर द्वारा महात्मा गांधी इंटर कॉलेज परिसर में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता 91 वर्षीय प्रेम नारायण श्रीवास्तव जी ने की।

जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की’ की फगुनाहट के खूबसूरत भोजपुरी हिन्दी और उर्दू के रंगों का श्रोताओं ने भरपूर लुत्फ उठाया।

आप भी देखिए आकाशवाणी गोरखपुर एवं नेशनल एजुकेशन सोसाइटी की शानदार प्रस्तुति के कुछ अंश-

Gepostet von Manish Tiwari am Sonntag, 1. März 2020

 

Gepostet von Anamika Srivastava am Sonntag, 1. März 2020

 

Gepostet von Anamika Srivastava am Sonntag, 1. März 2020

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