जब भगवा राज ख़त्म होगा तब क्या होगा

अखिलेश अखिल


नई दिल्ली: राजनीति कब किसको पटकनी दे दे यह भला किसे पता। राजनीति के बड़े -बड़े चाणक्य कहलाने वाले भी भविष्य की राजनीति पर गच्चा खा जाते हैं। अभी बिहार में ही लालू -नीतीश के बीच के प्यार और दुत्कार को सबने देखा है। कौन कितना बड़ा सत्यवादी है और कौन कितना बड़ा बेईमान राजनीति में कोई मायने नहीं रखता। समय और अवसर के साथ पालक झपकते सब बदल जाते हैं। ऐसे में ही यह बात सामने आती है कि जब भगवा राज ख़त्म होगा तब देश की राजनीति कैसी होगी ? बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह क्या करेंगे ? जब बदलाव प्रकृति का नियम है और राजनीति बैर भाव पर आधारित है तब बीजेपी के सत्ताविहीन होने के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित कौन होगा?

क्या केवल जस्टिस लोया की मौत से ही जुड़े सवाल उठेंगे या फिर सोहराबुद्दीन -प्रजापति इनकाउंटर मामला का भी फिर से उद्भेदन होगा। या फिर अमित शाह के बेटे जय शाह की कहानी फिर आगे बढ़ेगी ? या फिर से सहारा -बिड़ला डायरी कांड की परते सिलसिलेवार खोली जायेगी। इसका जबाब अभी किसी के पास नहीं है। लेकिन इसकी समझ भले ही बीजेपी के लोगों और उसके भक्तो को नहीं हो लेकिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को इसकी जानकारी है कि पहिया बदलेगा तो उनके दिन भी कठिनाई से ही गुजरेंगे। सबसे बड़ी बात तो यह है कि अमित शाह के भीतर प्रधानमन्त्री बनने का भी सपना है। मोदी के बाद पीएम की कुर्सी के असली दावेदार शाह ही माने जाते हैं और ऐसी उनकी समझ और सोच भी है।

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लेकिन अब संघ परिवार भी शाह से जुड़े कुछ मसलों को लेकर गंभीर है। संघ को भी पता है कि जब सिख दंगे की जांच फिर से कराई जा सकती है तो फिर से गुजरात दंगे से लेकर सोहराबुद्दीन -प्रजापति फर्जी इनकाउंटर ,लोया प्रकरण से लेकर जय शाह और सहारा -बिड़ला कांड की जांच भी फिर से कराई जा सकती है। और जांच होगी भी। राजनीति यही कहती है और भूत से लेकर वर्तमान की राजनीती ऐसी ही दिखती रही है। लेकिन इसमें सबसे बड़ी बात अब यह हो गयी है कि अमित शाह के सपने अब पुरे नहीं हो सकते। पीएम बनने का उनका सपना शायद ही पूरा हो सके।

दो मामलों पर गौर करें तो साफ़ हो जाता है कि अमित शाह से बेटे जय शाह और सहारा -बिड़ला मामले की शुरुआत कोई बाहरी तत्व से नहीं की गयी। इसका खुलासा सरकार के भीतर और खासकर वित्त मंत्रालय से ही हुआ दिखता है। इसके मायने क्या हैं ? क्या अरुण जेटली की जानकारी के बिना ऐसा खुलासा संभव था ? माना ही नहीं जा सकता। देश का वित्त विभाग सबका सफ़ेद और काला चिठ्ठा रखता है। यही विभाग ऐसा है जो किसी को वरदान भी देता है और शाप भी। भविष्य की राजनीति के लिए शाह की राजनीति कैद कर दी गयी है। जेटली मुख्यतः एक अब्बल दर्जे के वकील हैं और उनकी अपनी साख भी है। फिर ऊपर से वित्त मंत्री का पद। पैसा कहा से आता है और कहा जाता है इसके साथ ही पैसे कैसे आता है और कैसे बनाया जाता है इसकी पेचदगियाँ जेटली से ज्यादा कौन जाने ! इसलिए आगे की राजनीति पर बहुत कुछ खुलासा होना बाकी है।

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इसलिए सच तो यही है कि नरेंद्र मोदी- अमित शाह आज अपने को कितना ही चक्रवर्ती, महाबली माने भविष्य की राजनीति अकल्पनीय होने की संभावना है। अभी जिस विचार की राजनीति आगे बढ़ रही है उससे साफ़ है कि अगला पीएम भी मोदी ही बनेंगे। कोई परेशानी नहीं दिखती। संयोग भी ऐसा ही है। अचानक कोई राजनितिक दुर्योग आ जाए तो कहना मुश्किल है। लेकिन यह तो साफ़ है कि आगे की राजनीती बेहद विकट होने वाली है। अभी सुप्रीम कोर्ट के जजों से जुडी जो बातें सामने आयी है उसमे भी लोया प्रकरण समाया हुआ है। भविष्य की राजनीति भी लोया पर ही केंद्रित होगी।

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