जमीनी विवाद निपटाए बिना ग्राम पंचायतों का विकास नामुमकिन : मेनका गांधी

सुलतानपुर: पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद मेनका गांधी ने कहा कि जमीनी विवादों को निपटाए बिना ग्राम पंचायतों का विकास करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राजस्व कर्मियों की मदद से जो ग्राम प्रधान अपने गांव को शून्य या दस से कम विवाद तक पहुंचा देंगे, उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। इसके लिए प्रधानों को चार महीने का समय है।

अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे के तीसरे और अंतिम दिन जिले के दूबेपुर, कुड़वार, कूरेभार, धनपतगंज व बल्दीराय में पंचायत जनप्रतिनिधियों से सीधा संवाद करते हुए उन्होने ग्राम पंचायतों में समृद्धि लाने के लिए मिलकर साथ काम करने का आवाह्न किया। उन्होंने कहा वह जिलाधिकारी से कह कर ऐसी व्यवस्था करेंगी कि प्रत्येक गांव में लेखपाल, पुलिस व सरपंच तथा गांव के लोग बैठकर जमीनी विवाद का निपटारा कराए।

स्थानीय सांसद ने कहा कि हर प्रधान अपने गांव में फलदार 200 पौधों जैसे आम, जामुन महुआ का पौधरोपण करें। उन्होंने तालाबों की स्वच्छता पर भी प्रधानों को निर्देशित किया और कहा कि तालाब की जलकुंभी से सबसे अच्छी जैविक खाद बनती है जिसे खेतों में डालने से पैदावार 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। गांधी ने कहा कि गांवों का विकास न रुके इसके लिए पंचायत सचिवों की तैनाती उनके मूल निवास वाले गांवो में कलस्टर बनाकर किए जाने का सुझाव डीएम को दिया है जो लागू हो रहा है।

इसके बाद भी पंचायत सचिव गांव नही आते तो मुझे बताइए सख्त कारर्वाई की जाएगी। गांधी ने पंचायत प्रतिनिधियों से संवाद के दौरान कहा मैने विधवा, वृद्धा व दिव्यांग पेंशन बनाने के लिए न्याय पंचायत स्तर पर कैंप लगाने का निर्देश मुख्य विकास अधिकारी को दिया है जिसकी शुरुआत जयसिंहपुर से हो चुकी है।

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