जमीन पर नहीं आम के पेड़ पर घोसला बनाकर रहता है ये आदमी, जानिये क्यों

नई दिल्ली: जीवन भी क्या क्या रंग दिखाता है, जब आदमी को पंख ना होते हुए भी चिड़िया की तरह पेड़ पर रहना पड़ता है, ये आपबीती है एक गरीब आदिवासी की, जिसकी झोपड़ी को प्रशासन ने गैरकानूनी ठहराकर बेरहमी से गिरा दिया, तब उसने आम के पेड़ को ही अपना आशियाना बना लिया था। ये गरीब आदिवासी कर्नाटक के मैसूर का रहने वाला है। 2 साल तक जिंदगी जंगलों में जैसे तैसे कट गई, अब उसे जमीन का सुख मिलने जा रहा है।

इस आदमी का नाम ‘गीज्जा’ है। ‘जेनु कुरुबा’ नामक अनुसूचित जाती का गिज्जा कद काठी से बूढ़ा हो चला है लेकिन धैर्य और विश्वास की उम्मीद 2 सालों से दिल में जगाए रखी है। खाने-पीने से लेकर हर एक चीज का जुगाड़ गीज्जा ने अपने घोसले में कर रखा था। घर न होने के बावजूद भी 2 साल तक एक खुशनुमा जीवन जिया।

मीडिया के अनुसार दो साल पहले जंगलों में डेरा डालने आए गीज्जा का जंगल अधिकारियों ने विरोध किया था, जबकि गीज्जा का कहना था कि उसके पूर्वज यहां रहते हैं। उसका दावा था कि यह पेड़ उसके पूर्वजों ने लगाया था। हालांकि, उसकी पत्नी अपने बड़े बेटे कुल्ला के साथ शहर की ओर चली गई जहां वह नौकरानी का काम करती थी। लेकिन गीज्जा की आखों में उम्मीद थीं की उसे एक दिन न्याय जरूर मिलेगा और घर भी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जंगल अधिकार नियम के तहत अब उसे जल्दी ही आवास की सुविधा दी जाएगी। 2 सालों तक पक्षी बन कर रह चुके गीज्जा ने जंगलों में कई मुसीबतों का सामना किया। उसकी हिम्मत की सराहना की जनि चाहिए। जो लोग उम्मीद हार कर जीना छोड़ देते हैं, उनके लिए गीज्जा एक जीता जागता मिसाल है।

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