जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग जम्मू-कश्मीर के पांच सांसदों के सुझावों पर चर्चा करेगा

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के बारे में गठित परिसीमन आयोग गुरुवार को केंद्र शासित प्रदेश के सांसदों के सुझावों पर चर्चा करेगा। उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में आयोग उन पांच सांसदों द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर चर्चा करेगा जो पैनल के सहयोगी सदस्य हैं। आयोग को छह मई तक अपनी रिपोर्ट देनी है।

जम्मू- कश्मीर के पुनर्गठन के छह महीने बाद मार्च 2020 में परिसीमन आयोग का गठन संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का फिर से सीमांकन करने के लिए किया गया था। पैनल को अपने कामकाज में सरकार और राजनीतिक दलों से स्वतंत्र विधायी समर्थन के साथ स्थापित किया गया था। केंद्र ने 22 फरवरी को आयोग को दो महीने का विस्तार दिया गया था। इस विस्तार से पहले, पैनल को मार्च 2021 में एक वर्ष का विस्तार दिया था।

पैनल ने पिछले साल दिसंबर में केंद्र शासित प्रदेश में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों के लिए 16 सीटों को आरक्षित करने के अलावा जम्मू संभाग के लिए छह और कश्मीर संभाग के लिए एक सीट बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को लेकर क्षेत्रीय दलों की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।

इन पांच सहयोगी सदस्यों में केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह और जुगल किशोर शर्मा हैं। ये दोनों जम्मू संभाग से लोकसभा सांसद हैं। इनके अलावा डॉ फारूक अब्दुल्ला, मोहम्मद अकबर लोन और हसनैन मसूदी भी शामिल हैं और ये तीनों कश्मीर घाटी से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद हैं। आयोग के दो अन्य आधिकारिक सदस्यों में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सुशील चंद्रा और जम्मू-कश्मीर के राज्य चुनाव आयुक्त (एसईसी) के.के. शर्मा हैं।

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