जलियांवाला हत्याकांड- ब्रिटेन को डर है कि अगर उसने माफी मांगी तो दूसरे देशों से भी उठेगी इसी तरह की मांग

नई दिल्ली: भारत की आजादी के लिए हर भारतीय नागरिक ने ब्रिटिश शासन लोहा लिया था। अंग्रेजों के शोषण और अत्याचार की सबसे बड़ी घटना 100 साल पहले अमृतसर के घटी जब जलियांवाला बाग को ब्रिटिश सेना ने खूनी रविवार बना दिया था। ब्रिटेन के पूर्व पीएम विंस्टन चर्चिल इस कृत्य को राक्षसी करार दे चुके हैं लेकिन ब्रिटिश सरकार अभी भी औपचारिक रूप से माफी मांगने को तैयार नहीं है। माफी की मांग केवल भारतीयों द्वारा ही नहीं की जा रही है बल्कि ब्रिटेन के सांसद और यहां तक की पाकिस्तान भी इसकी मांग कर रहा है।

तो आखिर ब्रिटेन को माफी मांगने से दिक्कत क्यों है? अगर ब्रिटेन इस ऐतिहासिक गलती के लिए मिसाल की तलाश कर रहा है तो उसे अपने राष्ट्रमंडल सहयोगी कनाडा से ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं। कनाडा ने साल 2016 में 1914 के कोमागाटा मारू घटना के लिए माफी मांगी थी, जब सैकड़ों भारतीय जहाज यात्रियों को कनाडा में प्रवेश से रोक दिया गया था। कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने देश की संसद में इस घटना के लिए खेद प्रकट किया था जिसकी वजह से कई लोगों की मौत हुई।

ब्रिटेन को यह भी डर है कि अगर 100 साल पहले किए गए अपने कृत्य के लिए उसने माफी मांगी तो दूसरे देशों जैसे साउथ अफ्रीका से भी इसी तरह की मांग उठेगी। 20वीं सदी में बोअर कैंप में, अकाल और बीमारी करीब 28 हजार लोगों जिनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे शामिल थे, उनकी मौत का कारण बना था। हालांकि भारतीयों ने अभी तक जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए वित्तीय मुआवजे की मांग नहीं की है। बता दें ब्रिटिश सरकार ने माउ माउ विद्रोह के समय 5,228 केन्या पीड़ितों को साल 2013 में 20 मिलियन पाउंड (181.65 करोड़ रुपये) का मुआवजा दिया था, जिससे वह आज भी उबर नहीं पाई है।

हालांकि इस घटना के लिए भी ब्रिटिश सरकार ने अब तक माफी नहीं मांगी है। इसलिए अगर ब्रिटेन जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए माफी मांगता है तो अकेले भारत के लिए एक डॉजियर तैयार करना पड़ सकता है जिसमें बंगाल का अकाल भी शामिल होगा जिसमें दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटिश सैनिकों को खाना खिलाने के लिए भारत के अन्न भंडार को नष्ट कर 4 मिलियन लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया था। उस समय ब्रिटिश सेना ने जलियांवाला बाग की खूनी घटना में मृतकों के लिए परिजनों और घायलों के लिए 19.42 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की थी जिसे अगर आज के समय के हिसाब से देखा जाए तो इसका मूल्य करीब 108 करोड़ रुपये होगा। अतीत में इस घटना को उन्होंने शर्मनाक और व्यथित करने वाला करार दिया है लेकिन उनकी कठोरता उन्हें माफी मांगने से रोक देती है। ऐसा लगता है कि ब्रिटेन के केवल होंठ ही नहीं बल्कि उनकी जीभ भी कठोर है।

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