जल्द घोषित हो मध्य प्रदेश में कांग्रेस का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के दो दिग्गज कांग्रेस नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को चुनाव जीतने का फॉर्मूला लिखकर दिया है। कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने-अपने नेतृत्व में चुनाव जीतने का मंत्र लिखित रूप में राहुल को दिया है।

सूत्रों का दावा है कि अगले कुछ दिनों में दोनों नेताओं में से किसी एक को कांग्रेस अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर सकती है। बता दें कि कांग्रेस कई राज्यों में गुटबाजी से जूझ रही है। ऐसे में राहुल ने इससे निपटने की सीधी योजना बनाई है, ताकि चुनाव के दौरान रणनीति को लागू करने में दिक्कत न आए। गुजरात विधानसभा चुनाव में नुकसान से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को एहसास हो गया कि राज्य की पार्टी इकाइयों की आंतरिक गुटबाजी चुनाव जीतने में बाधा है।

कमलनाथ या सिंधिया में किसी एक पर लगेगी मुहर

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के तीन बड़े नेता हैं, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह। इन्हीं नेताओं के बीच की गुटबाजी भी जग जाहिर है। इससे कार्यकर्ता पार्टी से दूर और दिशाहीन रहते हैं। इसी के मद्देनजर राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के सभी मतभेदों को हल करने फैसला किया है। सूत्रों ने बताया कि सिंधिया और कमलनाथ ने हाल ही में पार्टी प्रमुख को अलग-अलग जीत का फार्मूला दिया है। इसमें जातीय और सामुदायिक समीकरण भी शामिल किए गए हैं।

पार्टी के तीनों बड़े नेताओं को इन सभी समीकरणों की अच्छी समझ है। ये नेता जमीन पर काम कर रहे हैं और पार्टी की ताकत और कमजोरियों से बखूबी वाकिफ हैं। दिग्विजय सिंह अभी नर्मदा यात्रा पर हैं। ऐसे में राहुल गांधी कमलनाथ और सिंधिया को बुला सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि इन दोनों नेताओं में से किसी एक की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी पर राहुल गांधी जल्द मुहर लगा सकते हैं। कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम की घोषणा जल्द होने की संभावना है।

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बता दें कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन अब वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हैं। दिग्विजय सिंह नर्मदा की परिक्रमा कर रहे हैं और उनकी यह यात्रा मार्च में समाप्त होगी। उनकी इस यात्रा को आम जनता से जुड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, पार्टी नेतृत्व विधानसभा चुनावों के लिए उन पर निर्भरता नहीं दिखा रहा। बता दें कि दिग्विजय और सिंधिया के बीच जब अदावत चल रही थी, तब उन्होंने कमलनाथ का समर्थन किया था, जबकि आम कार्यकर्ता सिंधिया के साथ थे।

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