जातिगत जनगणना के समर्थन में आकर केशव ने 2024 के महाभारत का ताप बढ़ाया!

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव यह जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में जब तक भाजपा के पास केशव प्रसाद मौर्य जैसा नेता है तब तक यूपी में सपा की वापसी मुश्किल है। इस लिये पूरी समाजवादी पार्टी केशव मौर्य पर एकजुट होकर हमलावर होती है। भाजपा में जो पिछड़े नेता पिछड़ा के नाम पर मलाई काट रहे हैं वह ईर्ष्या में इतने अंधे हो गये हैं कि केशव को घिरने के बाद मुंह फेर लेते हैं। भले ही केशव की आड़ में भाजपा घिर जा रही हो। इस लड़ाई में केशव अभिमन्यु बन कर जूझ रहे हैं और कथित भाजपाई दिग्गज मौन होकर तमाशा देख रहे हैं।

सपा जानती है कि भाजपा के पास सबसे मजबूत पिछड़े नेता केशव मौर्य हैं तो अखिलेश, रामगोपाल, शिवपाल और स्वामी प्रसाद मौर्य सब एक साथ केशव पर हमला करते हैं। भाजपाराज की सत्ता और संगठन में मलाई खाने के लिये दर्जनों पिछड़े नेता हैं। लेकिन वह केवल खानापूर्ति और सांकेतिक बन कर रह गये हैं। केशव को विपक्षियों से अकेले लड़ना पड़ता है। वह विपक्ष पर हमला भी करते हैं और विपक्ष के हमलों का बचाव भी करते हैं। जबकि दलितों और पिछड़ों के मुद्दे पर भाजपा के सवर्ण नेता खुद को दूर रखते हैं।

ताजा मामला उन्नाव का है, जहां शुक्रवार को दौरे पर गये उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जातिगत जनगणना के समर्थन करके सनसनी फैला दिया। जातिगत जनगणना, रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों को लेकर यूपी-बिहार में घिरती जा रही भारतीय जनता पार्टी को उबारने की कोशिश में जुटे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री नम्बर एक केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मैं जातीय जनगणना का समर्थन करता हूँ।

शुक्रवार को उन्नाव पहुंचे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जातिगत जनगणना को लेकर कहा कि मैं जातिगत जनगणना के विरोध में नहीं हूं, बल्कि समर्थन में ही हूं। ये होनी चाहिए इसमें कोई गलत नहीं है।इस पर चुटकी लेते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि भाजपा में केशव मौर्य की कोई सुनता ही नहीं है।बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव जाति की जनगणना को लेकर कहा कि जाति की जनगणना होनी चाहिए। देश के कई राजनीतिक दल इसके पक्ष में हैं। समाजवादी पार्टी के विधायक, सांसद, गांव-गांव जाकर इस बात के लिए लोगों में जागरूकता लाएंगे। कुछ समय में पार्टी का नेतृत्व गांवों में जाकर लोगों को इसके बारे में जागरूक करेगा, क्योंकि जब जनगणना होगी तभी संभव हो पाएगा कि विकास योजनाओं से लोगों को)कैसे जोड़ें। जिसको लेकर सपा ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। अंदेशा यह भी लगाया जा रह है कि सपा यह मुदा सदन में भी उठा सकती है। माना जा रहा है कि केशव मौर्य ने अखिलेश यादव को राजनैतिक पटखनी देने के लिये यह वक्तव्य दिया। शाम होते-होते जब तक यह मामला गरमाता उसके पहले ही स्वामी प्रसाद मौर्य ने शनिवार को ट्विटर कर फिर से सियासी हलचल मचा दी है।

(यह लेखक के निजी विचार हैं)

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