जानिए आखिर श्री कृष्ण के बाद सुदर्शन चक्र कहाँ गया

लखनऊ: जानिए आखिर श्री कृष्ण के बाद सुदर्शन चक्र कहाँ गया? महाभारत युद्ध में भगवान कृष्ण ने केवल धर्म और न्याय के पक्ष में ही सभी निर्णय लिए चाहे वो छलपूर्वक कर्ण से कवच और कुण्डल लेने की योजना हो या दुर्योधन को उसकी माँ गांधारी के सामने निर्वस्त्र ना जाने देना। क्यूंकि यदि कृष्ण ऐसा नहीं करते तो कहीं न कहीं कौरवों का हित होता और यदि ऐसा होता तो पांडवों के साथ घोर अन्याय होना निश्चित था। पूरे युद्ध के समय भगवान् कृष्ण ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई परन्तु इतिहास के सबसे शक्तिशाली शास्त्रों में से एक सुदर्शन चक्र होने पर भी उन्होंने एक बार भी शस्त्र नहीं चलाया। क्यूंकि वे जानते थे कि यदि सुदर्शन चक्र प्रयोग किया गया तो विपक्ष का विनाश निश्चित है। और भगवान् कृष्ण दोनों पक्षों को अवसर देना चाहते थे. सुदर्शन चक्र जिस पर भी चलाया जाता था उसका वध करके ही वापस आता था। यह केवल मन में विचार करने से ही शत्रु पर प्रहार कर देता था और बिना वध किये वापस नहीं आता था। सुदर्शन चक्र का निर्माण किसने किया इसके विषय में विभिन्न पुराणों में भिन्न भिन्न मत हैं। परन्तु इस लेख में हम आपको बताएँगे कि श्री कृष्ण के बाद सुदर्शन चक्र कहाँ गया ?

सुदर्शन चक्र का धारण:

सुदर्शन चक्र को भगवान् विष्णु की तर्जनी ऊँगली पर देखा जाता है। भगवान् विष्णु ने सुदर्शन चक्र से अनेक दैत्यों का संहार किया. सुदर्शन चक्र की विशेषता यह थी की यह ऊँगली पर तेज़ी पर घुमाने पर वायु के प्रवाह के साथ बहुत अधिक वेग से अग्नि प्रज्ज्वलित करके शत्रु को भस्म कर देता था। इसका नाम मात्र ही शत्रु सेना में भय व्याप्त होने के लिए पर्याप्त था। सुदर्शन चक्र को भगवान् विष्णु एवं उनके अवतार भगवान् कृष्ण ने धारण किया। उल्लेखनीय है की सुदर्शन चक्र केवल भगवान् विष्णु के अवतारों को ही प्राप्त होता है क्यूंकि यदि सभी को इस अस्त्र को चलाने की जानकारी होती तो संभव था की इसका दुरुपयोग किया जाता।

सुदर्शन चक्र की संरचना:

इसकी संरचना अत्यंत जटिल है। कुछ मान्यताओं के अनुसार इसका निर्माण विश्वकर्मा द्वारा किया गया। पुराणों में बताया गया है की विश्वकर्मा ने सूर्य के तेज से तीन वस्तुओं के निर्माण किया, सुदर्शन चक्र, पुष्पक विमान और त्रिशूल। वहीँ कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसका निर्माण महादेव शिव ने किया था और उन्होंने ही यह भगवान् विष्णु को दिया था। एक बार आवश्यकता पड़ने पर विष्णु जी ने यह माँ पार्वती को दिया और पार्वती की कृपा से यह भगवान् कृष्ण को प्राप्त हुआ। एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण को सुदर्शन चक्र भगवान परशुराम से प्राप्त हुआ। और अब तक चूँकि भगवान् कृष्ण के पश्चात विष्णु का कोई अवतार नहीं हुआ है तो प्रश्न ये आता है की कृष्ण के बाद सुदर्शन चक्र का क्या हुआ, ये किसके पास गया?

कहाँ गया सुदर्शन चक्र:

इसके उत्तर में भविष्य पुराण का एक उल्लेख है जिसके अनुसार भगवान कृष्ण के इस संसार से अदृश्य होने के पश्चात सुदर्शन चक्र उसी स्थान पर धरती में स्वतः ही गढ़ गया और जब भगवान विष्णु कल्कि अवतार के रूप में पुनः इस संसार में आएंगे तब सुदर्शन चक्र को धारण करेंगे। ऋग्वेद में भगवान् विष्णु के सुदर्शन चक्र का तार्किक वर्णन दिया हुआ है जिसके अनुसार सुदर्शन चक्र कोई भौतिक शस्त्र नहीं अपितु समय का चक्र है और यह इतना शक्तिशाली है की समय को भी बाँध सकता है। इस तर्क के कुछ उदाहरण भी उल्लेखनीय है, जैसे महाभारत में अर्जुन ने सूर्यास्त से पहले ही जयद्रथ का वध करने का प्रण लिया परन्तु जब भगवान् कृष्ण को ज्ञात हुआ की समय निकल रहा है और अर्जुन का यह प्रण टूट सकता है तब उन्होंने सुदर्शन चक्र से सूर्य को ढक लिया था। महाभारत के समय जब भगवान् कृष्ण ने अर्जुन को विराट रूप के दर्शन दिए तब उन्होंने सुदर्शन चक्र की सहायता से समय को रोक लिया और इसी अंतराल में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया. यदि इस दृष्टि से देखा जाए तो सुदर्शन चक्र भगवन विष्णु का गुण है और वे जब चाहे तब इसे प्रकट कर सकते हैं. ऐसा कहा जाता है की सुदर्शन चक्र भगवान् विष्णु की कुण्डलिनी शक्ति है।

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