जानिए कारगिल जंग का पूरा घटनाक्रम

3 मई,1999: एक चरवाहे ने भारतीय सेना को कारगिल में पाकिस्तान सेना के घुसपैठ कर कब्जा जमा लेने की सूचनी दी।
5 मई: भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम जानकारी लेने कारगिल पहुंची तो पाकिस्तानी सेना ने उन्हें पकड़ लिया और उनमें से पांच की हत्या कर दी।
9 मई: पाकिस्तानियों की गोलाबारी से भारतीय सेना का कारगिल में मौजूद गोला बारूद का स्टोर नष्ट हो गया।
10 मई: पहली बार लद्दाख का प्रवेश द्वार यानी द्रास, काकसार और मुश्कोह सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को देखा गया।
26 मई: भारतीय वायुसेना को कार्रवाई के लिए आदेश दिए गए।
27 मई: कार्रवाई में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ मिग-27 और मिग-29 का भी इस्तेमाल किया, लेकिन फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता को बंदी बना लिया।
28 मई: एक मिग-17 हेलीकॉप्टर पाकिस्तान द्वारा मार गिराया गया और चार भारतीय फौजी मारे गए।
1 जून: एनएच- 1A पर पाकिस्तान द्वारा भारी गोलाबारी की गई।
5 जून: पाकिस्तानी रेंजर्स से मिले कागजातों को भारतीय सेना ने अखबारों के लिए जारी किया, जिसमें पाकिस्तानी रेंजर्स के मौजूद होने का जिक्र था।
6 जून: भारतीय सेना ने पूरी ताकत से जवाबी कार्यवाई शुरू कर दी।
9 जून: बाल्टिक क्षेत्र की 2 अग्रिम चौकियों पर भारतीय सेना ने फिर से कब्जा जमा लिया।
11 जून: भारत ने जनरल परवेज मुशर्रफ और आर्मी चीफ लेफ्टीनेंट जनरल अजीज खान से बातचीत की रिकॉर्डिंग जारी किया, जिससे जिक्र है कि इस घुसपैठ में पाक आर्मी का हाथ है।
13 जून: भारतीय सेना ने द्रास सेक्टर में तोलोलिंग पर कब्जा कर लिया।
15 जून: अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने परवेज मुशर्रफ से फोन पर कहा कि वह अपनी फौजों को कारगिल सेक्टर से बाहर बुला लें।
29 जून: भारतीय सेना ने टाइगर हिल के नजदीक दो महत्त्वपूर्ण चौकियों प्वाइंट 5060 और प्वाइंट 5100 पर फिर से कब्जा कर लिया।
2 जुलाई: भारतीय सेना ने कारगिल पर तीन तरफ से हमला बोल दिया।
4 जुलाई: भारतीय सेना ने टाइगर हिल पर पुनः कब्जा पा लिया।
5 जुलाई: भारतीय सेना ने द्रास सेक्टर पर पुनः कब्जा किया। इसके तुरंत बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने बिल क्लिंटन को बताया कि वह करगिल से अपनी सेना को हटा रहे हैं।
7 जुलाई: भारतीय सेना ने बटालिक में स्थित जुबर हिल पर कब्जा पा लिया।
11 जुलाई: पाकिस्तानी रेंजर्स ने बटालिक से भागना शुरू कर दिया।
14 जुलाई: प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ऑपरेशन विजय की जीत की घोषणा कर दी।
26 जुलाई: तत्कालीन प्रधानमंत्री ने इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाए जाने का एलान किया।

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