जानिए मृत शरीर को ले जाते समय क्यों कहते हैं ‘राम-नाम सत्य है’

जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु होना भी एक अटल सच्चाई है| श्रीमदभगवत गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण ने यही संदेश दिया है कि मृत्यु एक अटल सत्य है। जिसने जन्म लिया है उसे मृत्यु अवश्य प्राप्त होगी। आत्मा अमर है और वह निश्चित समय के अलग-अलग शरीर धारण करती है। जब जिस शरीर का समय पूर्ण हो जाता है आत्मा उसका त्याग कर देती है। इसे ही मृत्यु कहा जाता है। हिंदू धर्म में जब किसी की शव यात्रा जा रही होती है तो आपने देखा होगा कि मृतक के परिजन ‘राम नाम सत्य है’ कहते जाते हैं क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की कि आखिर शव यात्रा में मृतक के परिजन क्यों कहते हैं..?

आपको बता दें कि पञ्च प्राण मृत्यु के उपरांत मनुष्य के शरीर को छोड़ ब्रह्माण्ड में विलीन हो जाता है जिनकी साधना और पुण्याई अच्छी होती है उन्हें तुरंत गति मिलती है और वे मृत्यु उपरांत की यात्रा तय करने हेतु अपने आगे का प्रवास आरम्भ कर देते हैं परन्तु कलयुग में अधिकांश व्यक्ति की साधना इतनी नहीं होती और मृत्यु के उपरांत अचानक ही शरीर को न पाकर कुछ लिंगदेह अपनी वासना की तृप्ति हेतु दुसरे शरीर में प्रवेश करने का प्रयास करने लगते हैं।

और ऐसे में उनके आप-पास उपस्थित व्यक्ति में वे सरलता से प्रवेश कर सकते हैं अतः राम का नाम लेने से उपस्थित लोगों के ऊपर कवच निर्माण होता है जो उनकी रक्षा करता है| साथ ही लिंगदेह और मृत देह से प्रक्षेपित होने वाली काली शक्ति से भी रक्षण होता है। इसलिए जब कोई शव यात्रा जाती है तो उस मृतक के परिजन घर से लेकर मरघट तक “राम नाम सत्य है, सत्य बोलो मुक्त है” कहते जाते हैं|

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