जानिए राजनीतिक दल कैसे फैलाते हैं सबसे ज्यादा फर्जी खबरे

दिल्ली ब्यूरो: ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी रिपोर्ट राजनीतिक दलों की पोलपट्टी खोल रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें फैलाने में राजनीतिक दल और सरकारी एजेंसियां सबसे आगे है। इतना ही नहीं ये दोनों फर्जी खबरें फैलाने के साथ ही सेंसरशिप का प्रयोग करने, सार्वजनिक संगठनों, विज्ञान और मीडिया में लोगों का भरोसा कम करने के लिए करोड़ों रुपये भी खर्च करते हैं। इस रिपोर्ट के बाद साफ़ हो गया है कि समाज में जो कुछ भी दिख रहा है और समाज जिस मसले पर बांटता दिख रहा है उसके लिए फर्जी खबरे सबसे ज्यादा जिम्मेदार है।

रिपोर्ट में पाया गया है कि यह समस्या वैश्विक स्तर पर बहुत बढ़ रही है। दुनियाभर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों की सोच को तोड़-मरोड़कर पेश करना एक गंभीर खतरे के रूप में सामने आ रहा है। भारत में भी मॉब लिंचिंग की घटनाओं में सोशल मीडिया की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए कोशिशें की जा रही हैं।

रिपोर्ट की सह लेखक समांथा ब्रैडशॉ ने कहा, ‘दुनिया भर में संगठित रूप से सोशल मीडिया के जरिये हेराफेरी करने वाले देशों की संख्या 28 से बढ़कर 48 हो गई है।’ उन्होंने कहा कि इनमें से सबसे अधिक बढ़ोतरी राजनीतिक दलों की तरफ से हो रही है। राजनीतिक दल चुनावों के दौरान गलत सूचनाएं और फर्जी खबरें फैलाते हैं।

ये सब कई देशों की लोकतांत्रिक सरकारों की तरफ से फर्जी खबरें रोकने के प्रयासों के बावजूद हो रहा है। स्टडी रिपोर्ट के प्रमुख लेखक फिल हॉवर्ड ने कहा, ‘इसके साथ समस्या यह है कि फेक न्यूज से निपटने वाली ‘टास्क फोर्स’ सत्तावादी शासन का सेंसरशिप को वैधानिक बनाने का हथियार बन गया है।’

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