जिग्नेश और भीम आर्मी से घबराई बीजेपी की नजर टिकी मीरा कुमार पर

अखिलेश अखिल


बीजेपी एक नए पैतरे में जुटी है। गैर भाजपाई नेताओं को अपने खेमे में लाने का शगल बीजेपी में लम्बे समय से जारी है। अब बीजेपी एक दलित नेता की खोज में है जो भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद और जिग्नेश मेवानी पर भारी पड़ सके। ऐसे में बीजेपी की नजर जगजीवन बाबू की बेटी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीरा कुमार पर जाकर टिकी हुयी है। माना जा रहा है कि बीजेपी जगजीवन बाबू के नाम पर कोई बड़ा काम करने की तियारी में है और उन्हें आंबेडकर की तरह ही प्रचारित ,प्रसारित करना चाहती है। बीजेपी को इसमें कोई गुरेज भी नहीं। वह पहले भी कांग्रेस के नामी नेताओं को अपने यहाँ शामिल कर राजनीती करती रही है। आंबेडकर कोंग्रेसी ही रहे हैं अब बीजेपी उन्हें अपना आदर्श मान रही है। सरदार पटेल कोंग्रेसी ही रहे लेकिन बीजेपी अब पटेल को अपना आइकॉन मान रही है। मदन मोहन मालवीय के नाम बीजेपी ब्राह्मण वोट की राजनीति पिछले कजाई सालों से करती है। अब बीजेपी की नजर मीरा कुमार पर है।

दरअसल मीरा कुमार पर नजर बीजेपी की इसलिए गयी है कि उसके तरकस में जिग्नेश और भीम आर्मी के नेता को मात देने के लिए कोई दलित नेता सामने नहीं है। जो नेता रूपी जीव बीजेपी और उनके सहयोगी पार्टियों में है भी तो सब चुके हुए है और दलित राजनीति में अब उनकी पकड़ लगभग ढीली हो चली है। बीजेपी को पहले लगा था कि यूपी में मायावती को मात देकर दलित राजनीती को ही समाप्त कर दिया है या कमजोर कर दिया है लेकिन जिग्नेश और भीम आर्मी के सामने आने के बाद उसे लगने लगा है कि अगर समय रहते किसी मजबूत दलित नेता को खड़ा नहीं किया गया तो आने वाली राजनीती में बीजेपी को पछाड़ खानी पर सकती है।

अभी बीजेपी के पास पासवान ,मांझी ,अठावले है लेकिन इनकी राजनीति अब दलितों को नहीं भा रही है। और भा भी रही है तो अपने राज्य तक ही। उत्तर भारत को साधने के लिए बीजेपी को किसी बड़े दलित चैहरे की जरूरत है और इसी वजह से बीजेपी की नजर मीरा कुमार पर जा गड़ी है। यह बात और है कि मीरा कुमार कांग्रेस में हैं और कांग्रेस ने राष्ट्रपति चुनाव में उनको उम्मीदवार भी बनाया था। पर उनके बारे में अक्सर भाजपा के प्रति हमदर्दी रखने के आरोप लगते रहे हैं। बेशक वे कांग्रेस में हैं, लेकिन यह भी हकीकत है कि बाबू जगजीवन राम को कांग्रेस ने वह महत्व नहीं दिया, जो उनको मिलना चाहिए था।वे 1946 में बनी अंतरिम सरकार में मंत्री बने थे और 1971 के बांग्लादेश युद्ध के समय देश के रक्षा मंत्री थे।

इसीलिए बीजेपी उन्हें सरदार पटेल की तरह उनको महत्व देकर उन्हें एक आईकॉन के तौर पर उभारना चाहती है। खबर है कि वे उनके ऊपर एक फीचर फिल्म बनाने पर विचार चल रहा है और साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि सरकार उनके नाम पर कोई बड़ी आर्थिक योजना भी घोषित कर सकती है। वैसे सीधे तौर पर कांग्रेस में भी अभी कोई बड़ा दलित नेता नहीं है सिवाए मीरा कुमार के। यह देखना होगा कि राहुल की अगुवाई वाली कांग्रेस में मीरा कुमार की राजनीति कितना फिट बैठती है। अगर राहुल की राजनीति में मीरा कुमार सहज रह पाती है तब तो ठीक है वरना मीरा कुमार को लेकर बीजेपी की गंभीरता जिस तरह से बनी हुयी है , उसमे मीरा को लेकर किसी भी तरह की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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