जिलाधिकारी ने राधेश्याम कथावाचक स्मृति समारोह के समापन कार्यक्रम में भाग लिया

बरेली। जिलाधिकारी श्री शिवाकान्त द्विवेदी ने राधेश्याम कथावाचक स्मृति समारोह के समापन कार्यक्रम में फ्यूचर ग्रुप कॉलेज के सभागार में भाग लिया।
जिलाधिकारी ने कहा कि पंडित राधेश्याम कथावाचक बरेली जनपद के महान व्यक्तित्व के धनी थे, वे कथावाचक, नाटयकार, साहित्यकार, एवं सामाजिक संस्कृति अध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत व्यक्ति थे। उनको रामकथा के प्रचार-प्रसार एवं नए रूप में व्यक्त करने का श्रेय दिया जाता है। राधेश्याम रामायण उनकी अमरकृति है तथा उनके द्वारा रचित नाटक, साहित्य के जिज्ञासूयों एवं छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत है। इनके नाटकों में राष्ट्रीयता की भावना, सामाजिक सद्भभावना एवं समसता की भावना को प्रमुख स्थान दिया गया है। भगवान श्री राम के चरित्र का सर्वप्रथम गुणगान तमशा नदी के पावन तट पर स्नान करके निकलते हुए महर्षि बाल्मीकि ने अपनी आंखों के सामने बहेलियों द्वारा करोंच पक्षी के जोड़े में से एक को आकारण मारे जाते हुए देखकर उनका हृदय शोक और करुणा से भर गया और उस शोक एवं करुणा की अभिव्यक्ति एक श्लोक के रूप में हुई जो रामायण का प्रथम श्लोक बना। वस्तुता वही श्लोक उनकी करूणा की अभिव्यक्ति ही है।राम का व्यक्तित्व करुणामय, कृपामय एवं क्षमामय रहा है उनका व्यक्तित्व सभी कालों में सभी व्यक्तियों के लिए आदर्श एवं अनुकरणीय रहा है। भारतीय साहित्य में जिन विद्वानों एवं साहित्यकारों ने अपनी लेखनीय चलाई उनका आधार हमेशा ही आदिकवि वाल्मीकि रामायण ही रहा है। भगवान श्री राम का व्यक्तित्व चरित्र एवं उनके द्वारा स्थापित राम राज्य हमेशा ही आदर्श राज्य की व्यवस्था के रूप में हमेशा ही रोल मॉडल बना रहेगा क्योंकि राम राज्य, विकास, सुरक्षा, सामाजिक न्याय, लोक कल्याण, करुणा, संवेदना एवं लोक तांत्रिक मूल्य पर आधारित था। उनके द्वारा स्थापित राम राज्य हमेशा ही सभी समाज एवं सभी राष्ट्र के लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में प्रासांगिक बना रहेगा।
बरेली से ए सी सकसेना ।

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