जीएम फसलों पर FSSAI के नए मसौदे पर राकेश टिकैत ने लिखा- #NoGMfoods

नई दिल्ली, 12 जनवरी 2022। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा तैयार किए गए जीएम खाद्य पदार्थों पर मसौदा नियम को लेकर विरोध कड़ा हो गया है। देशभर के तमाम खाद्य सुरक्षा कार्यकर्ताओं द्वारा इस पर अपनी चिंता जताए जाने के बाद भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बुधवार को इस मसौदे के खिलाफ अपनी आवाज कड़ी उठाई।

किसान नेता और भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Koo App पर जीएम फसलों को लेकर एफएसएसएआई के नए ड्राफ्ट के विरोध में की गई एक पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, “कुछ सर्वेक्षणों के साथ-साथ बीटी बैंगन और एचटी सरसों की सार्वजनिक बहस से यह बहुत स्पष्ट है कि भारत में जीएम खाद्य फसलों की अस्वीकृति है। जैसा खाद्य सुरक्षा नियामक असुरक्षित खाद्य पदार्थों को हमारी खाद्य श्रृंखला में क्यों लाना चाहता है ?

#NoGMfoods हैशटैग के साथ टिकैत ने एफएसएसएआई के इस मसौदे के खिलाफ स्पष्ट रूप से अपना विरोध जाहिर किया है। टिकैत ने इसके साथ ही यह सवाल भी उठाया कि जब यह बात साफ तौर पर सबसे सामने है कि भारत में जीएम खाद्य फसलों की अस्वीकृति है, तो खाद्य सुरक्षा की नियामक एजेंसी एफएसएसएआई आखिर क्यों असुरक्षित भोजन को हमारी खाद्य श्रृंखला में जोड़ना चाहती है।

टिकैत ने भाकियू के सह-मीडिया प्रभारी सौरभ उपाध्याय की कू पोस्ट को शेयर किया है, जिसमें उपाध्याय ने लिखा है, “भारत में नागरिकों के साथ-साथ राज्य सरकारों के पास #NoGMfoods की एक दृढ़ और मजबूत स्थिति है । फिर @fssaiindia GM फ़ूड क्यों लाना चाहता है? आखिर किसके फायदे के लिए..?”

दरअसल, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पिछले साल नवंबर में इस संबंध में एक मसौदा जारी किया था। इस मसौदे का उद्देश्य पूरे देश में जीएमओ, जीईओ और एलएमओ के उत्पादन और खपत को नियंत्रित और विनियमित करना है क्योंकि अन्य बातों के साथ ये निर्धारित करते हैं कि खाद्य प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति के बिना कोई भी व्यक्ति जीएमओ से प्राप्त किसी भी खाद्य या खाद्य सामग्री का आयात, बिक्री, निर्माण, भंडारण या वितरण नहीं करेगा। मसौदे में कहा गया है कि एक प्रतिशत (1%) या उससे अधिक के व्यक्तिगत GEO संघटक वाले सभी खाद्य उत्पादों को इस शर्त के साथ लेबल किया जाएगा कि भोजन में “GMO / GMO से प्राप्त सामग्री शामिल है”।

वर्तमान में, खेती के लिए स्वीकृत एकमात्र फसल (बीटी) कपास है और भारत में अन्य जीएम बीजों पर काफी समय से प्रतिबंध प्रभावी है। आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य फसल बीटी बैंगन बड़े पैमाने पर परीक्षण के लिए तैयार है, लेकिन इसकी मंजूरी को देशभर के किसानों और पर्यावरणविदों के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। मसौदे के प्रकाशन और भारत में जीएमओ खाद्य उत्पादों के आधिकारिक रूप से इस्तेमाल की स्वीकृति देने की संभावना ने जनता के बीच बहस खड़ी कर दी है। पर्यावरणविद, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, मिट्टी और पर्यावरण पर बड़े पैमाने पर प्रतिकूल प्रभाव वाले जीएमओ खाद्य उत्पादों के इस्तेमाल और खपत का कड़ा विरोध करते हैं, जबकि अन्य बेहतर उपज, उत्पादक और कम खाद्य अपव्यय के लिए इस नई तकनीक को लागू करने के कथित फायदों पर भरोसा करते हैं।

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