जीएसटी ने तोडी मकान मालिकों की कमर, हाउसिंग बोर्ड कर रहे वसूली

भोपाल: एमपी हाउसिंग बोर्ड और बीडीए से मकान खरीदने वाले मालिकों से जीएसटी की वसूली शुरु कर दी गई है। इससे इन मकान मालिकों पर आर्थिक भार बढ गया है। जीएसटी लागू होने के पहले खरीदे गए मकानों पर बकाया राशि में 18 प्रतिशत जीएसटी की मांग की जा रही हैं। बोर्ड और प्राधिकरण के अफसरों का कहना है कि जीएसटी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से यह टैक्स वसूला जा रहा है। इसका सीधा असर अफोर्डेबल हाउसिंग के दायरे में आने वाले ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकानों पर भी पड़ रहा है।

इनसे भी ढाई लाख रुपए तक जीएसटी की मांग की जा रही है। वहीं वाणिज्यिक कर विभाग के अफसरों का कहना है कि एक जुलाई से पहले बनी और बिकी प्रापर्टी तथा मटेरियल पर जीएसटी नहीं लगेगा। ऐसे में सरकारी निर्माण एजेंसियों से मकान खरीदने वाले लोग लाखों रुपए का अतिरिक्त भार पड़ने से परेशान हैं। जिन लोगों ने 1 जुलाई 2017 के पहले मकान खरीदा और उसका पूरा पैसा एक साथ नहीं चुका सके उनसे ये निर्माण एजेंसियां बकाया राशि पर जीएसटी ले रही हैं।

चालीस लाख के मकान के अगर किसी ने दस लाख रुपए 1 जुलाई के पहले चुका दिए थे और बाकी तीस लाख रुपए अब चुकाना चाहें तो इस राशि पर 5 लाख 40 हजार रुपए जीएसटी के तौर पर जमा कराने के लिए कहा जा रहा है। अफोर्डेबल हाउसिंग में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकान पांच लाख और 13 लाख रुपए में बुक किए गए हैं तो उन पर बकाया राशि पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगाया जा रहा है। इस संबंध में वित्तमंत्री मंत्री जयंत मलैया का कहना है कि बीडीए के अफसरों ने बताया कि पुरानी प्रापर्टी पर जीएसटी लेने को लेकर स्पष्ट आदेश नहीं है पर अधिकारियों द्वारा जीएसटी को लेकर बनी भ्रम की स्थिति में यह टैक्स वसूलने के लिए कहा गया है।

इसलिए जो लोग बकाया जमा करने आते हैं, उनसे जीएसटी मांगते हैं। इसके लिए बाकायदा रजिस्टर मेंटेन कर रहे हैं कि कितना जीएसटी किससे वसूला गया है। जीएसटी काउंसिल के सारे फैसले तो याद नहीं रहते। जानकारी लेकर बता पाउंगा। वहीं एमपी हाउसिंग बोर्ड के अपर आयुक्त एसके मैहर का कहना है कि जीएसटी लगना तो नहीं चाहिए पर लेखाधिकारी से जानकारी लेकर ही कुछ कह सकूंगा।

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