जी-23 के कुछ नेता गुलाम नबी आजाद के घर पर जुटे, पिछले साल कांग्रेस हाईकमान से नाराज होकर लिखा था लेटर

नई दिल्ली: मंगलवार को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद और अन्य तीन सांसदों की विदाई के मौके पर पीएम मोदी द्वारा दिया गया विदाई भाषण दिनभर सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बना रहा। वहीं शाम को गुलाम नबी आजाद के घर पर शाम को कांग्रेस के कुछ ऐसे नेता पहुंचे, जो गत अगस्त में कांग्रेस हाईकमान को लेटर लिखने वाले असंतुष्ट नेताओं के गुट जी-23 के सदस्य थे। इन नेताओं में लोकसभा सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी, शशि थरूर, हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, महाराष्ट्र के पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा शामिल थे।

कहीं बागी खेमा तो नहीं…
हालांकि आजाद के घर की इस विजिट को एक शिष्टाचारगत मुलाकात बताया जा रहा है, लेकिन पीएम के भाषण के बाद और उनके द्वारा जी-23 का जिक्र किए जाने के मद्देनजर इन नेताओं का घर जाना अपने आप में एक अलग संकेत माना जा रहा है। जिस तरह से कांग्रेस में खेमेबाजी दिख रही है, पार्टी में वफादारी बनाम बागी खेमा तैयार हो चुका है, उसमें पीएम द्वारा आजाद की तारीफ को पार्टी की दुखती रग पर हाथ रखने की तरह देखा जा रहा है।

विदाई में दिया भावुक भाषण
गुलाम नबी आजाद ने आज राज्य सभा की सदस्यता से विदाई लेते हुए ऐसा बयान दिया जिसकी खूब चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम देशों के हालात को देखते हुए भारतीय मुसलमान होने पर मुझे गर्व है। उन्होंने कहा कि मेरी हमेशा से सोच रही है कि हम बड़े खुशकिस्मत हैं। जन्नत हिंदुस्तान ही है। मैं तो आजादी के बाद पैदा हुआ, लेकिन आज गूगल के जरिए मैं पढ़ता हूं, देखता हूं, सुनता हूं कि मैं उन खुशकिस्मत लोगों में हूं जो पाकिस्तान कभी नहीं गया।

हिंदुस्तान मुसलमान होने पर गर्व
पाकिस्तान के अंदर किस तरह के हालात हैं, तो मुझे गौरव महसूस होता है कि हम हिंदुस्तानी मुसलमान हैं। बल्कि, मैं आज कहूंगा कि विश्व में अगर किसी मुसलमान को गौरव होना चाहिए तो वह हिंदुस्तान के मुसलमान को होना चाहिए। हमने 30-35 सालों में अफगानिस्तान से लेकर ईराक और कुछ सालों से तो मुस्लिम देश एक दूसरे से लड़ाई करते हुए किस तरह से खत्म हुए जा रहे हैं। वहां हिंदुत्व तो नहीं है, वहां कोई क्रिश्चियन तो नहीं है, वहां दूसरा तो नहीं है जो लड़ाई कर रह हो। दूसरे देशों में जो बुराईयां हैं वो हमारे मुसलमानों में नहीं है।

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