जुमले की राजनीति चाय-पकौड़े तक ही संभव, झांसावाद से पकौड़ा वाद के बीच भटकते युवा

अखिलेश अखिल

लखनऊ ट्रिब्यून ब्यूरो: जुमले की राजनीति चाय -पकौड़े से आगे नहीं बढ़ सकती। चार साल पहले चाय के लायक देश था अब मोदी सरकार की नजर में देश को पकौड़ा की भी जरुरत है। चाय -पकौड़ा खाइये और बेचिये और आनंद मनाइये। 21 सदी के भारत का सच यही है। ठगिनी और झूठी राजनीती की यही देन है। पहले चाय की राजनीति से बीजेपी सत्ता में स्थापित हुयी और अब पकौड़े की राजनीति धूम मचा रही है।2019 की राजनीति पकौड़ा पॉलिटिक्स होगी। पीएम मोदी ने एक साक्षात्कार में पकौड़े को रोजगार से जोड़कर तहलका मचाया तो पार्टी के अध्यक्ष पिछले दिनों संसद में पकौड़ा बेच कर पेट चलाने की बात कहकर पकौड़े बेचने से जुड़े रोजगार को आगे बढ़ाने की बात कहकर देशी युवाओं को उद्वेलित कर दिया।

चारो तरफ पकौड़ा पॉलिटिक्स शुरू हो गया है। भक्त लोग पकौड़े की राजनीति को आधुनिक भारत का सच बता रहे हैं लेकिन जो भक्त नहीं हैं वे हमलावर हैं। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में पकौड़ा देश की सियासी मिजाज को प्रभावित करेगा। कई लोग तो यह भी कह रहे हैं कि चाय के साथ पकौड़ा बाजार में उतार कर गाढ़ी कमाई की जा सकती है और देश की दशा सुधारि जा सकती है। बेरोजगारी पर लगाम लगाईं जा सकती है। यह राजनीति का एक पक्ष हो सकता है। उधर जब से पकौड़ा को पीएम ने रोजगार से जोड़ा तब से युवाओं और छात्रों में हीनता की भावना भी घर कर गयी है। इसका उदाहरण यूपी ,बिहार जैसे राज्यों में चल रहे बोर्ड परीक्षा में देखा जा रहा है।

अब जब देश के पीएम ने पकौड़े बेचने को ही रोजगार बता दिया है तो छात्रों ने भी पढाई-लिखाई को गंभीरता से लेना छोड़ दिया है। दुनिया के सबसे बड़े एजुकेशन बोर्ड उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद (यूपी बोर्ड ) की परीक्षाएं शुरू हो गई हैं।पहले दिन गृहविज्ञान का पेपर था। सीसीटीवी की निगरानी और सख्ती की वजह से हाईस्कूल के सैकड़ों छात्र पेपर देने ही नहीं पहुंचे। खबर के मुताविक फैजाबाद जिले के 20फीसदी छात्रों ने हाईस्कूल की परीक्षा छोड़ दी।करोरे इंटर कॉलेज सरियावां के 18 में से केवल 3 बच्चों ने ही परीक्षा दी और यही हाल दूसरे स्कूलों का भी रहा।वहीं पर लखीमपुर के सरदार पटेल इंटर कॉलेज ममरी में 48 छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी। गुरुकुल इंटर कालेज मढ़िया के 26, कमलापति गुरुप्रसाद इटर कालेज सिकंदराबाद के 23 छात्रों ने परीक्षा नहीं दी।इसी तरह जिले में करीब15 फीसदी छात्र अनुपस्थित रहे।

आपको बता दें कि यूपी बोर्ड परीक्षाओं में काफी बड़े स्तर पर नक़ल चलती है जिसमें अभिभावक, स्कूल के टीचर्स और प्रिंसिपल तक लिप्त मिलते हैं।और ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिसमें पेपर की कापियों में नोट को स्टेपल किया जाता है। जब सरकारी स्कूलों में इस तरह से नक़ल चलेगी तो देश का भविष्य आगे कैसे बढेगा? और अब पकौड़े की कहानी। मोदी जी ने पकौड़े बेचने को रोजगार कहा। ठीक ही तो कहा था। गाँव -शहर के गरीब और कम पूंजी वाले लोग चाय पकौड़ा आदि काल से बेचते रहे हैं। इस व्यवसाय पर कुछ तपको का एकाधिकार भी है। चुकि मोदी जी गाँव और गरीबो को टारगेट करके बजट पेश किये हैं ,जाहिर है ग्रामीण भारत और शहरी गरीब इंडिया में चाय और पकौड़े के व्यवसाय के जरिए रोजगार बढ़ाने की कहानी आगे की राजनीति को बता रही है। 2014 के चुनाव में चाय वाले की राजनीति से सत्ता बदल गयी थी।

चाय ने देश के जनमानस को बदल दिया था। लोगों ने सोच लिया कि एक चाय बेचने वाला पीएम बनेगा तो देश की जनता की समस्या को नजदीक से देखेगा। देश बदलेगा। रोजगार का निर्माण होगा और भारत आगे बढ़ जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब चाय के साथ जब पकौड़ा सामने आ गया तो लोग बहुत कुछ समझने लगे हैं। इधर अमित शाह जी ने पकौड़े बेचने को भी रोजगार कहा और यह भी कहा कि युवाओ को पकौड़ा बेचना चाहिए। जरूर बेचना चाहिए साहेब। तो लगे हाथ जय शाह के लिए पकौड़े का भण्डार खोल दीजिये। इसलिए कि आपके जय शाह से ज्यादा पढ़े लिखे यहां के अधिकतर युवा हैं। सारे नेताओं और खासकर बीजेपी के नेताओं को अपने बाल बच्चो के लिए पकौड़े की दूकान खोलनी चाहिए। अब लोगों की नजर भी इसपर रहेगी। याद कीजियेगा अमित शाह जी आप कोई भगवान् तो हैं नहीं कि किसी का भाग्य लिखेंगे। हाँ सत्ता के जरिये किसी पर नकेल कस सकते हैं। ऐसा हो भी रहा है। आप कोई दार्शनिक भी नहीं। ज्यादा लम्बी डिग्री भी नहीं फिर आपके दर्शन को कौन सुने ?

इस देश के युवाओं ने भारत ही नहीं दुनिया के देशो का राजनितिक ,आर्थिक और सांस्कृतिक इतिहास का बड़ा ही अध्ययन किया है। उसने भारतीय नेताओं को भी देखा है और पढ़ा है। सब काल कवलित हो गए। कोई रहने नहीं आया है। केवल वही अमर होता है जो देश ,समाज के लिए कुछ करके जाता है। इसलिए आपसे निवेदन है कि देश को पकौड़े का हब मत बनाइये। वैसे भी आपके कहे बिना ही बहुत सारे पढ़े लिखे युवा वह काम कर रहे हैं जिसकी कल्पना उसने नहीं की थी। सब समय का फेर है। समय आदमी को बनाता भी है और बिगाड़ता भी है। कभी नाकाबिल आदमी भी बड़ा दिखता है और समय पलटते ही वह विलीन भी हो जाता है। इसलिए पकौड़े का बिजनेश सबसे पहले बीजेपी के नेता लोग अपने घर से शुरू करे।

देश में बेकारी का मूल कारण बढ़ती आवादी तो है ही ,सरकार की नीति ,वोट की राजनीति भी जिम्मेदार है। इसके लिए कांग्रेस भी जिम्मेदार और भाजपा भी। तमाम क्षेत्रीय दल भी जिम्मेदार हैं। भारत तो गरीब देश है। अमीर देश में भी बेकारी है। वहाँ भी बेकारी को लेकर सरकार खूब परेशान है। लेकिन असली समस्या भारत में झूठी राजनीति को लेकर। मोदी जी ने पिछले चुनाव में मुछ ऐठ कर कहा था कि सबको 15 लाख रुपिया और हर साल 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देंगे। बस बात इतनी सी है। मोदी जी के दोनों वादे फर्जी निकले। जुमला साबित हुआ। कांग्रेस ,सपा ,बसपा और तमाम दलों के साथ भाजपा भी उतनी ही झूठी ,ठगनी और गिरहकट वाली गिरोह साबित हो गयी। मूल कहानी यह है कि मोदी के चेहरे और जुबानो पर इस देश ने बहुत साल बाद यकीन किया था। वैसे यह देश हर पार्टी के वादों पर ज्यादा यकीं नहीं करती लेकिन मोदी के जुबान को पक्का माना था। लोगों और युवाओं का यह पक्का यकीन टूट गया। दिल टूट गया। विश्वास टूट गया। प्रेम -अनुराग टूट गया। किसी भी सरकार से देश के लोगों ने इस तरह से रोजगार की मांग नहीं थी। आज तक। मोदी से की जा रही है। क्योंकि मोदी जी पर युवाओं ने यकीं किया था। लेकिन अब सब भ्रम साबित हुआ।

इसमें अभी तक कोई दो राय नहीं की चुनावी राजनीति अभी भी मोदी जी के पक्ष में है। संभव है कि वे अगला चुनाव भी जीतेंगे। फिर क्या होगा ? यही ना कि मोदी 10 साल तक पीएम रहे। कांग्रेस को इससे परेशानी हो सकती है लेकिन आम लोगों को इससे क्या मतलब। हर कोई जानता है कि राजनीति भी एक व्यापार है और कमाई का जरिया भी। लोग यह भी जानते हैं कि राजनीति में ठग ,बेईमान ,गिरहकट ,झूठे लोग ,दलाल और दागी संस्कार वाले ज्यादा फलते फूलते हैं। आम लोग कभी नेता नहीं बनते। गरीब आदमी नेता बनता है लेकिन अगर उसमे झांसा देना ,झूट बोलना और ठगी करने का मादा नहीं है तो दुबारा नेता बने नहीं रह सकता। जो रहे होंगे वे बिरले ही होंगे। आज तो संभव नहीं। लेकिन इतना साफ़ हो गया है कि अगली राजनीती पकड़ा पर ही टिकी होगी। बीजेपी के लिए यह चुनावी रामवाण होगा या फिर जहर भी।

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