जून में 6000 और सितंबर में 300 डेली केस! पाकिस्‍तान में ‘रहस्‍यमयी’ ढंग से कम हुआ कोरोना

नई दिल्ली: हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स का अनुमान था कि अगस्‍त खत्‍म होते-होते पाकिस्‍तान में कोरोना से 80 हजार लोगों की मौत हो चुकी होगी। मगर 5 सितंबर तक वहां 6,335 मौतें हुईं। आखिर पाकिस्‍तान ने कोरोना पर काबू कैसे पाया या फिर ये कोई छलावा है? पाकिस्‍तान में कोरोना वायरस के नए मामलों की संख्‍या पिछले कुछ हफ्तों में बड़े नाटकीय ढंग से घटी है। जून के मध्‍य में जहां रोज 6 हजार से ज्‍यादा केस आ रहे थे, सितंबर में महज 300 नए मामलों का डेली पता चल रहा है। शनिवार रात तक वहां पर 2,97,512 मामले सामने आए थे जिनमें से 6,335 मरीजों की मौत हो गई।

पाकिस्‍तान के अनुसार, वहां 2,82,268 मरीज रिकवर हुए और फिलहाल सिर्फ 8,909 ऐक्टिव केस हैं। 22 करोड़ से ज्‍यादा आबादी वाले पाकिस्‍तान की स्थिति ऐसी थी कि अगस्‍त तक वहां पर 80 हजार मौतें होने का अनुमान था। पाकिस्‍तान का हेल्‍थ इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर खराब है, अर्थव्‍यवस्था ध्‍वस्‍त हो चुकी है, शहरों में भारी भीड़ है, इसके बावजूद हालिया हफ्तों में इन्‍फेक्‍शंस की संख्‍या घटी है। हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स इससे बड़ा हैरान है और पाकिस्‍तान की ‘सफलता’ की वजहें खोज रहे हैं। खासतौर से तब जब पड़ोसी भारत में कोविड-19 मामलों की संख्‍या रोज नया रेकॉर्ड बना रही है।

उम्र साबित हुआ एक बड़ा फैक्‍टर?
पाकिस्‍तानियों ने कोविड-19 से लड़ाई में बेहतर प्रदर्शन के पीछे कई वजहें गिनाई हैं। उनमें से एक दावा है कि पाकिस्‍तानी आबादी की औसत उम्र 22 साल है और कोविड-19 बुजुर्गों को ज्‍यादा परेशान करता है। इटली में औसत उम्र 46.5 साल है और वहां पर 35 हजार से ज्‍यादा मौतें हुईं। हालांकि इस पैमाने से देखें तो भारत में भी युवाओं की संख्‍या कम नहीं मगर वह सबसे ज्‍यादा प्रभावित टॉप-3 देशों में शामिल है। भारत में औसम उम्र 25 साल है और शहरों में भीड़ भी पाकिस्‍तान जैसी है।

कम टेस्‍ट करने से हुआ धोखा?
एक्‍सपर्ट्स ने टेस्टिंग और ट्रेसिंग को पाकिस्‍तान में कोरोना पर काबू के पीछे बड़ी वजह बताया है। सरकार ने कहा कि उसके सख्‍त कदमों की वजह से वायरस पर कंट्रोल हो पाया। अगस्‍त के आखिरी हफ्ते में, पाकिस्‍तान का पॉजिटिव टेस्‍ट रेट 2.09 प्रतिशत था जो कि वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशन की सीमा (5%) के भीतर है। इससे कम रेट होने पर उस देश में कोरोना काबू में है, यह मान लिया जाता है। हालांकि, एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि लिमिटेड टेस्टिंग से इन्‍फेक्‍शन के असल मामलों की संख्‍या ज्‍यादा हो सकती है। टेस्टिंग के आंकड़े देखें तो पाकिस्‍तान का भारत से कोई मुकाबला नहीं। ऊपर के ग्राफ को देखें तो पता चलता है कि भारत ने एक दिन में 10 लाख से ज्‍यादा टेस्‍ट का कीर्तिमान हासिल कर लिया है जबकि पाकिस्‍तान में जून से रोज औसतन 20 हजार टेस्‍ट ही हो रहे हैं।

अबतक सिर्फ 27 लाख टेस्‍ट कर पाया पाकिस्‍तान
worldometers.info के डेटा के अनुसार, भारत ने अबतक 4.6 करोड़ से ज्‍यादा लोगों का टेस्‍ट किया है। यानी प्रति 10 लाख आबादी पर 33,767 टेस्‍ट। वहीं पाकिस्‍तान ने सिर्फ 27 लाख से थोड़े ज्‍यादा टेस्‍ट किए हैं, यानी प्रति 10 लाख आबादी पर 12,216 टेस्‍ट। पर्सेंटेज की बात करें तो भारत अपनी 3.3% आबादी को टेस्‍ट कर चुका है जबकि पाकिस्‍तान ने महज 1.2% लोगों का टेस्‍ट किया है। ज्‍यादा मामले सामने आने के लिए ज्‍यादा टेस्‍ट करना जरूरी है। ऐसे में डेटा से पता चलता है कि पाकिस्‍तान में कोरोना की सही तस्‍वीर हमारे सामने नहीं आ सकी है।

अंडर-रिपोर्ट किए जा रहे केस?
जुलाई में WHO के सहयोग से पाकिस्‍तान में सीरो सर्वे किया गया था। उसके हिसाब से 11 प्रतिशत पाकिस्‍तानियों में कोविड के प्रति ऐंटीबॉडीज मिली थीं। भारत में हुए सीरो सर्वे बताते हैं कि बीमारी से प्रभावित हुए लोगों की संख्‍या रिपोर्ट हुए आंकड़ों से ज्‍यादा हो सकती है। डायचे वैले में पंजाब प्रांत (पाकिस्‍तान) के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि उसे ऊपर से आदेश हैं कि आंकड़े लगभग आधे कम कर देने हैं। इस महीने उसने 63 के बजाय केवल 34 नए मामलों को रिपोर्ट किया। जिलों के स्‍तर पर ऐसी ही हरकतों के चलते पाकिस्‍तान के आधिकारिक कोविड आंकड़ों पर शक होता है।

खुलकर सामने आने से डर रहे लोग!
पाकिस्‍तान में कम मामले होने के पीछे एक थिअरी से भी है कि लोग समाज के डर से बीमारी के बारे में नहीं बता रहे। डायचे वैले के अनुसार, “पाकिस्‍तान में अब ज्‍यादा लोगों को कोविड-19 के लक्षणों का पता है कि और वे तब तक अस्‍पताल नहीं आते जबतक बेहद गंभीर न हों।” जर्मन मीडिया ने पाकिस्‍तान एयरफोर्स के एक डॉक्‍टर के हवाले से भी यही बात कही है। एक्‍सपर्ट्स भी कहते हैं कि लोग कोविड का टेस्‍ट कराने से इसलिए घबरा रहे हैं कि कहीं पॉजिटिव आने पर समाज से उन्‍हें बाहर न कर दिया जाए।

पाकिस्‍तान की मृत्‍यु-दर भारत से ज्‍यादा
पाकिस्‍तान में ओवरऑल केस काउंट भले ही कम हो, वहां कोविड से 2.1% मरीजों की मौत हुई है। जबकि भारत में यह आंकड़ा 1.8 प्रतिशत है। असल में, भारत में लगातार केस फैटलिटी रेट घट रहा है जबकि पाकिस्‍तान में यह लगातार 2% के ऊपर बना हुआ है।

पाकिस्‍तान में घटी मौतों की संख्‍या
पाकिस्‍तान में कोविड-19 के 6,335 मरीजों की मौत हो चुकी है जबकि भारत में करीब 70 हजार। केसेज और मौतों के लिहाज से भारत दुनिया में अमेरिका और ब्राजील के बाद तीसरे स्‍थान पर है।

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