जेएनयू छात्र नेता पर हुये हमले में आरोपी का चेहरा सीसीटीवी फुटेज में दिखा

नई दिल्ली: जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्र नेता उमर खालिद पर कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बाहर हमले के मामले में पुलिस को कुछ खास सबूत हाथ लगे हैं। क्लब के बाहर और आस-पास के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के जरिए आरोपी का चेहरा पुलिस के सामने आ गया है और अब पुलिस सरगर्मी से उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस को शक है कि इस मामले में किसी जानकार या परिचित का रोल हो सकता है। मौके से बरामद हुई देसी पिस्टल पर भी किसी तरह का गिरने का निशान नहीं मिला है।

दरअसल, घटना के बाद कई लोगों ने दावा किया था कि भागते वक्त हमलावर के हाथ से पिस्टल छिटक कर सड़क पर गिर गई थी, लेकिन पुलिस सूत्रों ने बताया कि अगर पिस्टल आरोपी के हाथ से गिरती, तो ऊंचाई से गिरने की वजह से उस पर कोई ना कोई खरोंच जरूर आती या कोई निशान जरूर पड़ता, क्योंकि कारतूसों से भरी पिस्टल में काफी वजन होता है, लेकिन मौके से बरामद हुई पिस्टल पर ऐसा कोई निशान नहीं मिला है। इसके अलावा पिस्टल की मैगजीन से भी 6 कारतूस बरामद हुए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, यह एक देसी पिस्टल है और इस तरह के हथियार आमतौर पर भिंड-मुरैना इलाके में बनाए जाते हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक औपचारिक तौर पर यह नहीं माना है कि घटनास्थल पर गोली भी चली थी। पुलिस ने थाने की आर्मरी में मौजूद पुलिसवालों से भी पिस्टल की जांच कराई थी, लेकिन साफतौर पर यह पता नहीं चल पाया कि पिस्टल से गोली चली थी या नहीं। इसीलिए पुलिस अब बैलास्टिक एक्सपर्ट्स की मदद ले रही है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि गोली चली तो होगी, लेकिन उसका खोल पिस्टल की नाल में ही फंसी रह गया होगा, क्योंकि मौके से कोई खाली कारतूस बरामद नहीं हुआ है। इतना जरूर है कि लगभग सभी चश्मदीदों ने गोली चलने की आवाज आने की बात कही है। यही वजह है कि पुलिस फायरिंग होने के दावे की पुष्टि करने से पहले तमाम जरूरी सबूत जुटा लेना चाहती है।

इसके अलावा पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कार्यक्रम में शामिल होने के महज 10-15 मिनट के बाद ही उमर खालिद बाहर क्यों निकल आए। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह अपने साथियों के साथ चाय पीने बाहर गए थे और उसी दौरान यह घटना घटी। पुलिस इस घटनाक्रम से भी वारदात की टाइमिंग के तार जोड़ने की कोशिश कर रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इतने सारे छात्रों की मौके पर मौजूदगी के बावजूद आरोपी आखिरकार फरार होने में कामयाब कैसे हो गया।

साथ ही अगर उसके पास पिस्टल थी और उसने उमर के पास जाकर उसकी कमर पर पिस्टल लगा दी थी, तो उस वक्त गोली क्यों नहीं चलाई और बाद में सिर्फ हवाई फायर करके वह क्यों फरार हो गया। डीसीपी (नई दिल्ली) मधुर वर्मा ने कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए पुलिस से कोई इजाजत नहीं ली गई थी और ना पुलिस को इसकी सूचना दी गई थी, इसलिए वहां पुलिस फोर्स तैनात नहीं थी। घटना के बाद पुलिस ने कईं लोगों से पूछताछ की है और कुछ अहम सुराग पुलिस के हाथ लगे हैं, जिसके जरिए पुलिस जल्द ही इस केस को सुलझा लेगी।

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