झकझोरती बुलंदशहर की घटना पर शुरू हुए राजनीतिक बयान

दिल्ली ब्यूरो : बुलंदशहर की घटना की जितनी निंन्दा की जाय शायद कम ही हो। यह घटना मानवता के नाम पर कलंक तो है ही यूपी की सत्ता और शासक के लिए भी शर्मनाक है। यह घटना उस योगी सरीखे संत कहलाने वाले नेता और सूबे के मुख्यमंत्री के लिए भी किसी अभिशाप से कम नहीं। यह घटना लोकतंत्र के लिए भी खतरे की घंटी के सामान है। यह बात और है कि पिछले कुछ सालों से पश्चिम उत्तर प्रदेश अकसर ऐसी घटनानो का गवाह बनता है लेकिन जिस तरीके से बुलंदशहर की घटना को अंजाम दिया गया है और बजरंगदल के लोग इसमें शामिल होते दिख रहे हैं उससे साफ़ है कि हिंदुत्व के नाम पर हिंदुत्ववादी लोग कुछ भी करने को तैयार है।

बुलंदशहर में हुई घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। किसी ने सोचा नहीं था कि एक पुलिस अधिकारी की इस तरीके से हत्या कर दी जाएगी। इसके पीछे कौन है और उसकी मंशा क्या है, ये तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू ये है कि अब नेताओं की बयानबाजी शुरू हो गई है।

सीपीएम नेता प्रकाश करात ने कहा है कि कुछेक लोग इसे आने वाले लोकसभा चुनाव से भी जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि पिछली बार यानि 2013 में मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की गई थी। इसमें कई लोग प्रभावित हो गए थे। इसका राजनीतिक फायदा भी उठाया गया। कहीं इस बार भी ऐसी ही चाल तो नहीं है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि यूपी के सीएम तेलंगाना जाकर भड़काऊ भाषण दे रहे हैं। उन्हें अपने राज्य में कानून और व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। आखिर कैसे भीड़ ने अखलाक मामले से जुड़े अधिकारी की हत्या कर दी।

उधर भाजपा के विधायक और मंत्री के बयान में विरोधाभा दिख रहा है। सबलिया जिले के बैरिया क्षेत्र के भाजपा विधायक सिंह ने अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में बुलंदशहर हिंसा तथा पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या के आरोप में हिंदूवादी संगठनों, खासकर बजरंग दल को क्लीन चिट देते हुए कहा कि ऐसी सम्भावना है कि पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की मौत पुलिस की गोली से ही ही हुई है। उन्होंने दावा किया कि बजरंग दल के लोगों ने पथराव किया था, लेकिन गोली नहीं चलाई थी। लेकिन यूपी के मंत्री ओपी राजभर ने इसे सुनियोजित साजिश बता डाला।

उधर केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, ने कहा है कि ‘‘यह एक अमानवीय कृत्य है… इस आपराधिक हिंसक कृत्य के लिये जो भी जिम्मेदार हो, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। ’ उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही कहा है कि इस संबंध में सख्त कार्रवाई शुरू की जायेगी। उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह की हिंसा के दौरान वे ना सिर्फ लोगों बल्कि मानवता की भी हत्या करते हैं।’’ उन्होंने लोगों से एकजुट रहने की अपील की और ऐसे तत्वों से सावधान रहने तथा देश के सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करने की कोशिश करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने को कहा।

इंस्पेक्टर की बहन का दावा है कि क्योंकि वे अखलाक मामले की जांच में शामिल थे, इसलिए उनकी हत्या की गई। यह पुलिस के द्वारा ही रचित षडयंत्र का हिस्सा है। सुबोध सिंह के बेटे अभिषेक सिंह ने कहा, ‘‘मेरे पिता ने इस हिन्दू-मुस्लिम विवाद में अपना जीवन गंवा दिया। अगली बारी किसके पिता की होगी?’’ इंस्पेक्टर की पत्नी ने कहा है कि ‘उन्होंने पूरी ईमानदारी से काम किया और खुद पर सारी जिम्मेदारी ली। यह पहली घटना नहीं है, इसके पहले भी उन्हें दो बार गोली लगी थी। लेकिन अब कोई भी उन्हें न्याय नहीं दे रहा है। न्याय केवल तभी होगा जब उनके हत्यारों को मौत की सजा हो।’

बता दें कि अभी तक की जानकारी के मुताविक 27 लोगों को आरोपी बनाया गया है। दावा किया जा रहा है कि इनमें से कइयों के नाम हिंदूवादी संगठनों से जुड़े हुए हैं। हालांकि, स्वतंत्र स्रोतों से इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है।पुलिस ने भी अभी यह नहीं कहा है कि किसी संगठन ने ऐसा कराया है। बता दें कि सोमवार को कथित अवैध गोकशी को लेकर प्रदर्शन कर रही भीड़ हिंसात्मक हो उठी थी। भीड़ का पुलिस के साथ संघर्ष हुआ और उसने एक पुलिस चौकी भी जला दी। हिंसा में पुलिस इंस्पेक्टर और एक युवक की मौत हो गयी।

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