टिकट कटने और ब्लॉग लिखने के बाद आडवाणी से मुरली मनोहर जोशी की मुलाकात के क्या हैं सियासी मायने?

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने इस लोकसभा चुनाव में पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का पत्ता साफ करते हुए टिकट काट दिया। इसको लेकर दोनों नेताओं के नाराज होने की भी बातें कहीं गई। आडवाणी ने तो टिकट कटने के मसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, मगर मुरली मनोहर जोशी ने दो लाइनों का एक नोट जारी कर बताया कि उनसे पार्टी नेता राम लाल ने चुनाव लड़ने से मना किया, जिसकी वजह से वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।

उधर आडवाणी खेमे से यह बात उभरकर सामने आई कि वह टिकट कटने से नहीं बल्कि टिकट कटने के तरीके से नाराज हैं। क्योंकि ऐसा करने से पहले पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनसे संपर्क भी नहीं किया। इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने ब्लॉग लिखकर सियासी गलियारे में हलचल मचाई और पीएम मोदी को भी ट्वीट करना पड़ा।

इस बीच पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने उनसे शुक्रवार को मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान क्या चर्चा हुई, इसको लेकर बाहर ही नहीं भाजपा के अंदरखाने भी अटकलें लगतीं रहीं। दरअसल, आडवाणी ने ब्लॉग में कहा था कि उनकी पार्टी ने कभी भी अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को ‘देश-विरोधी’ नहीं माना है। पुष्ट सूत्रों ने कहा, आडवाणी से मुलाकात करने जोशी उनके घर पहुंचे। जोशी ने आडवाणी से उस दिन मुलाकात की है, जब लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है।

उनके कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार, इंदौर की मौजूदा सांसद ने भाजपा नेतृत्व से पार्टी उम्मीदवार को लेकर संशय समाप्त करने का आग्रह किया।1991 से गांधीनगर संसदीय क्षेत्र से पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे आडवाणी को टिकट नहीं दिया गया और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने वहां से अपना नामांकन भरा है। इससे पहले जोशी ने भी कानपुर की जनता को पत्र लिखकर कहा था कि वह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं और भाजपा महासचिव रामलाल ने उनसे चुनाव नहीं लड़ने के लिए कहा है। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र को भी टिकट नहीं दिया गया है।

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