डायमंड किंग सावजी धोलकिया एक बार फिर से सुर्खियों में, इस बार दान किया 50 करोड़ का हेलीकॉप्टर

अहमदाबाद, देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान (Padma Shri) मिलने के बाद हरि कृष्ण हीरा कंपनी के मालिक सावजी ढोलकिया (Savji Dholakia) एक बार फिर सुर्ख़ियों में आ गए है। सूरत में रहने वाले 59 वर्षीय सावजी ढोलकिया की सोशल मीडिया पर काफी तारीफ हो रही है। दरअसल, सावजी ढोलकिया (Savji Dholakia) को उनके परिवार ने 50 करोड़ रुपये का एक हेलीकॉप्टर गिफ्ट किया था। वहीं, ढोलकिया ने सामाजिक कामों के लिए इसे दान करने का फैसला लिया। उन्होंने सूरत में चिकित्सा और अन्य इमरजेंसी के हालात में उपयोग करने के लिए हेलिकॉप्टर दान किया।

ख़बरों के मुताबिक, ढोलकिया (Savji Dholakia) काफी समय से सूरत के लोगों को हेलीकॉप्टर गिफ्ट करना चाहते थे। जब उनके परिवार वालों ने उन्हें सरप्राइज गिफ्ट में हेलीकॉप्टर दिया। तो उन्होंने तुरंत उसे दान करने का फैसला ले लिया। पद्म श्री (Padma Shri) पुरस्कार से सम्मानित सावजी ढोलकिया ने कहा कि, मुझे नहीं पता था कि मेरा परिवार मुझे इतना बड़ा सरप्राइज गिफ्ट देने जा रहा है। मैं अपने परिवार से गिफ्ट को ठुकरा नहीं सकता था, इसलिए मैंने दिल से इसे सामाजिक कामों के लिए देने का फैसला किया।

ढोलकिया (Savji Dholakia) ने आगे कहा कि, सूरत गुजरात की आर्थिक राजधानी है। लेकिन, सूरत के पास कोई हेलीकॉप्टर नहीं है। इसलिए मैंने यह फैसला लिया है। इस तरह मैं यह गिफ्ट सूरत के लोगों और सामाजिक कामों के लिए समर्पित कर रहा हूं। बता दें कि सावजी ढोलकिया पानी की कमी वाले सौराष्ट्र क्षेत्र में जल संरक्षण और तालाब खोदने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने सौराष्ट्र में अमरेली जिले के लाठी तालुका में अपने पैतृक गांव के आसपास 75 से अधिक तालाबों का निर्माण किया है। ये सभी तालाब अकाला, दुधला, लाठी गांव आदि विभिन्न गांवों में बंजर पड़ी सरकारी जमीन पर बनाए गए हैं।

ढोलकिया (Savji Dholakia) नेक कामों के चलते सुर्खियों में बने रहते हैं। उन्होंने इससे पहले लॉयल्टी प्रोग्राम के तौर पर अपने कर्मचारियों को 500 कारों, 471 ज्वेलरी सेट और दो बेडरूम वाले 280 फ्लैटों को दिए थे। ढोलकिया की कंपनी में कुल मिलाकर 5,500 कर्मचारी हैं और कंपनी का सालाना टर्नओवर 6000 करोड़ रुपये से अधिक है।

सावजी ढोलकिया (Savji Dholakia) ने महज 13 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया था। इसके बाद वह साल 1977 में राज्य की एक सरकारी बस से सूरत आए। तब उनके पास सिर्फ 12.50 रुपये थे। लेकिन, आज उनके पास करोड़ों की संपत्ति है। उन्होंने अपनी मेहनत की वजह से आज यह मुकाम हासिल किया है। अब वह हीरा उद्योग और सूरत शहर के भी सबसे प्रभावशाली व्यक्ति बन गए हैं।

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