डॉक्टरों की लापरवाही से मरीज की जान, वकीलों ने किया जमकर हंगामा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ब्रेन हैमरेज की महिला मरीज की मौत के बाद सोमवार को वकीलों ने केके हास्पिटल में जमकर हंगामा किया और स्टाफ से गाली-गलौज कर तोड़फोड़ की। इस दौरान कर्मचारी डर के मारे अस्तपताल से बाहर निकल गये और वजीरगंज पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर गयी और स्थिति को काबू में किया। मृतका के परिजनोें का आरोप है कि अस्पताल के डाक्टरों की लापरवाही से मरीज की जान चली गयी, जबकि केके हास्पिटल मैनेजमेंट का कहना है कि मरीज के परिजनों को हर स्थिति से पहले ही वाकिफ करा दिया गया था।

वजीरगंज थानान्तर्गत डालीगंज सूरजकुण्ड स्थित केके हास्पिटल के संस्थापक डा. केएन सिंह का कहना है कि चार दिन पहले उनके हास्पिटल में एक महिला मरीज रीता सिंह (50) पत्नी अरुण कुमार सिंह चौहान निवासी भौली बख्शी का तालाब गंभीर हालत में भर्ती करायी गयी थी। उनकी हालत बहुत गंभीर थी। ब्रेन हैमरेज व चेस्ट इंफक्शन के कारण वह लगभग कोमा में थीं। इस हालत के बारे में परिजनों को पहले ही बता दिया गया था। परिजनोें का कहना था कि ट्रामा सेन्टर में वेन्टिलेटर न मिलने के कारण वह उसे ययहां लेकर आये हैं। उनकी मदद करें। परिजनोें की परेशानी को देखते हुए मरीज को भर्ती कर लिया गया था। चार दिन तक दवा के सहारे उन्हें रखा गया।

वेन्टिलेटर में जहां रखा गया था वहां भी मरीज के एक तीमारदार को रहने की इजाजत दे दी गयी थी, ताकि बाद में कोई शक की गुंजाइश न रहे। सोमवार को अचानक मरीज की हालत बिगड़ने लगी। डाक्टरोें ने भरसक कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मरीज की मौत के बाद उनके घर एक लड़की ने हंगामा शुरू कर दिया और फोन कर लोगोें को बुलाया। कुछ देर बाद दो दर्जन वकील हास्पिटल में घुसे और कर्मचारियोें के साथ मारपीट, गाली-गलौज व तोड़फोड़ करने लगे। डर के मारे कर्मचारी हास्पिटल से बाहर भागे और जान बचायी। इस बीच हास्पिटल की ओर से वजीरगंज पुलिस को सूचना दी गयी। पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में किया।

मरीज के परिजन डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगा थे, इसे देखते हुए हास्पिटल प्रशासन ने पुलिस से लाश का पोस्टमार्टम कराने की गुजारिश की, जिसे मानते हुए पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उधर, हास्पिटल के संस्थापक डा. केएम सिंह व सुपरीटेण्डेंट डा. डीपी सिंह का कहना है कि हंगामे के दौरान मरीज के परिजन शव मको लेकर चले गये, क्योकि वह अस्पताल के बिल का भुगतान नहीं करना चाहते थे। करीब 60 हजार का बिल बनता है, जिसे देने से इनकार कर रहे हैं। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन की ओरे से भी पुलिस को तहरीर दी गयी है।

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