डॉ. आंबेडकर मामला: सरकार के निर्णय का राज्यपाल ने किया स्वागत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने उत्तर प्रदेश के समस्त अभिलेखों में भारतीय संविधान के शिल्पी डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के सही नाम अंकित करने के संबंध में जारी शासनादेश को सही बताते हुए सरकार के निर्णय का स्वागत किया है।

राज्यपाल ने बताया कि कुलाधिपति के रूप में उन्होंने पाया कि आगरा विश्वविद्यालय का नाम ‘ डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा अंकित है जबकि ‘भारत का संविधान की मूल प्रतिलिपि (हिन्दी संस्करण) के पृष्ठ 254 में डॉ. आंबेडकर ने हस्ताक्षर करते हुए ‘ डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर लिखा है। राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 में उनका नाम हिन्दी में ‘डाक्टर भीमराव अम्बेडकर लिखा है जो कि उचित नहीं है। इसी प्रकार ‘अम्बेडकर के स्थान पर ‘आंबेडकर लिखना उचित होगा।

राज्यपाल ने बताया कि डॉ. आंबेडकर का सही नाम लिखे जाने के संबंध में उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केन्द्रीय गृह मंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं मायावती को भी पत्र प्रेषित किया था। आगरा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह 05 दिसम्बर, 2017 में राष्ट्रपति की उपस्थिति में डॉ.भीमराव आंबेडकर के नाम से जुड़े विश्वविद्यालय के नाम में उचित संशोधन की उन्होंने बात कही थी।

उन्होंने इस संबंध में 11 दिसम्बर, 2017 को राष्ट्रपति से भेंट की तथा नई दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करके लोगों से डॉ. आंबेडकर के सही नाम का प्रयोग करने हेतु आह्वान भी किया। उनके सुझाव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उचित पाया तथा राज्य विधान मण्डल के दोनों सदनों से राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 में इस आशय के संशोधन का विधेयक 22 दिसम्बर, 2017 को सभी राजनैतिक दलों की सर्वसम्मति से पारित हुआ जिसके पश्चात् आगरा विश्वविद्यालय का नाम ‘ डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा हुआ।

भारत सरकार की ओर से डॉ. आंबेडकर की जन्मशताब्दी के अवसर पर डाक टिकट 1991 में जारी हुआ। उस टिकट पर डॉ. आंबेडकर का नाम हिन्दी में ‘डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकरÓ और अंग्रेजी में डा. बी.आर.अम्बेडकर लिखा है।

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