डोनाल्ड ट्रंप समेत नरेंद्र मोदी की रणनीति भी हुई फेल, 39 साल की इस प्रधानमंत्री ने सूझ-बूझ से पाया कोरोना पर काबू

नई दिल्ली: कोरोना वायरस यानी कोविड-19 का कहर इस वक्त पूरी दुनिया पर टूटा है। इसके पीछे वजह है, खतरनाक वायरस को गंभीरता से न लेना। जब चीन के वुहान शहर में ये वायरस पहली बार मिला था, तब दुनियाभर के देश इसे मामूली समझ रहे थें। हालांकि इस तबाही के मंजर को कुछ ही देश ऐसे थें जिन्होंने गंभीरता से लिया और आज वे इस पर काबू पाने में सफल साबित हुए। इनमें शामिल है ताइवान और न्यूजीलैंड। न्यूजीलैंड की 39 साल की महिला प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस को लेकर समय रहते सख्त फैसले लिये जिसके परिणाम इस वक्त पूरे दुनिया के सामने उदाहरण बनकर सामने आए हैं। कम उम्र की इन प्रधानमंत्री के सामने बड़े-बड़े अनुभवी नेता भी फेल हो गए।

दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में शामिल डोनाल्ड ट्रंप, नरेंद्र मोदी और बोरिस जॉनसन भी अपने अनुभवों को साबित नहीं कर पाए, लेकिन दूसरी ओर न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने कम अनुभव के बावजूद अपनी सूझ-बूझ से इस महामारी पर काबू कर लिया। अब तो न्यूजीलैंड में लॉकडाउन में ढील भी जा रही है। इस देश में 27 अप्रैल से कोरोना अलर्ट-4 को हटा दिया जाएगा ताकि देश अब अपनी अर्थव्यवस्था को भी काबू कर सके।

सही समय पर फैसला
दरअसल, न्यूजीलैंड की 39 साल की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने कोरोना के खतरे को भांपते हुए समय रहते सही फैसले लिये जिसके परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने हैं। भारत और न्यूजीलैंड में लमसम एक दो दिन के अंतराल में ही लॉकडाउन का ऐलान किया गया था। 23 मार्च को न्यूजीलैंड में लॉकडाउन लागू की गई थी, तब वहां कोरोना के मामले करीब 363 थी, वहीं भारत में 25 मार्च से लॉकडाउन का ऐलान किया गया था, तब देश में 500 मामले सामने आए थें।

भारत-न्यूजीलैंड का एक साथ फैसला, फिर भी अलग आंकड़े
देश में लॉकडाउन कहां और कितना सफल होता है, ये आंकड़ों से आंका जा सकता है। न्यूजीलैंड में जहां कोरोना के करीब 1105 मामले हैं और सिर्फ 12 लोग मारे गए हैं, वहीं भारत में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 17 हजार से ज्यादा है और 559 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। खबरों की माने तो न्यूजीलैंड में नए मामलों का दर एक फीसदी से भी कम है। इसलिए अगले सोमवार से यहां ढील देनी शुरू हो जाएगी। हालांकि कोरोना अलर्ट-3 जारी रहेगा, जहां सोशल डिस्टेंसिंग बनाना जरूरी रहेगा।

क्या मिली छूट
आपको बता दें कि न्यूजीलैंड ने 22 जनवरी से कोरोना की जांच शुरू कर दी थी। इस वक्त बाकी देश अपने में मस्त थे और इस संकट को भांपने में असफल रहे। न्यूजीलैंड में कोरोना अलर्ट लेवेल-4 हटाया जाएगा। इसके तहत, देश में स्कूलों को खोल दिए जाएंगे, उत्पादन और वानिकी से जुड़े उद्योग-धंधे शुरू हो जाएंगे। सड़क और भवन निर्माण का काम शुरु हो जाएगा। रेस्तरां खुलेंगे लेकिन कोई वहां खा नहीं पाएगा बस पैक कराने के निर्देश हैं। शादी या अंतिम संस्कार में अधिकतम 10 लोग जमा हो सकते हैं। इसकी समीक्षा करने के बाद आगे फैसला लिया जाएगा।

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