तलवार दंपती को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीबीआई

नई दिल्ली: सीबीआई ने आरुषि-हेमराज हत्याकांड में तलवार दंपती को बरी किए जाने के हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपती को इस मामले में सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री जहां से चली थी पिछले साल अक्टूबर में वहीं पहुंच गई जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रवक्ता का कहना है कि सीबीआई ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दे दी है। हालांकि ऐसा करने में उसने कई महीने लगा दिए।

हेमराज की पत्नी ने विगत दिसंबर में ही सर्वोच्च अदालत में अपील कर दी थी। पिछले साल 12 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपती को बरी किया था। 9 साल पहले 15-16 मई 2008 की रात जब 14 वर्षीय आरुषि तलवार की हत्या हुई थी तब यह सवाल उठा था कि हत्यारा कौन है? मामले की जांच शुरू हुई और जांच एजेंसी की बदलती थ्योरी और उस पर उठते सवालों के बीच यह केस आगे बढ़ता रहा। हालांकि शुरुआत से लेकर आखिर तक यह केस मिस्ट्री बना रहा और अब भी यह सवाल कायम है कि आखिर कातिल कौन है? अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है और सीबीआई ने तमाम आधार पर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।

सीबीआई ने अपनी अपील में कहा कि निचली अदालत का फैसला सही था और हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को दरकिनार कर दिया, जो सही नहीं है। उल्लेखनीय है कि मई 2008 को नोएडा के जलवायु विहार में डॉक्टर दंपती राजेश तलवार और नूपुर तलवार के घर उनकी बेटी आरुषि का शव बरामद हुआ था। हत्या का शक नौकर हेमराज पर गया, लेकिन अगले ही दिन घर की छत पर हेमराज का शव पाया गया जिसके बाद मामला बेहद पेंचीदा होता गया। आरुषि और हेमराज का मोबाइल भी गायब था। हत्या का मकसद क्या था? हथियार जिससे वारदात को अंजाम दिया गया वह गायब था। आरुषि की हत्या के बाद चूंकि घर से हेमराज गायब था इसलिए तत्काल उसी पर शक की सूई घूमी लेकिन बाद में जब उसका शव तलवार के घर की छत से बरामद हुआ तो मामला फिर से उलझ गया।

किरकिरी होती देख मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया है। सीबीआई ने मामले की छानबीन के दौरान पुलिस से इतर इस मामले में घरेलू नौकरों पर संदेह जाहिर किया। सीबीआई ने कहा कि वारदात को खुखरी जैसे हथियार से अंजाम दिया गया और फिर तलवार के नौकर कृष्णा से पूछताछ हुई और एक महीने बाद 13 जून को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। फिर सीबीआई ने एक के बाद एक बाकी नौकरों को भी गिरफ्तार किया। लेकिन इसमें खास सफलता नहीं मिली और नौकरों को जमानत मिल गई। छानबीन के बाद सीबीआई ने तलवार दंपती पर संदेह जताया लेकिन कहा कि चूंकि केस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है ऐसे में साक्ष्यों की कडि़यां तलवार दंपती के खिलाफ नहीं जुटती हैं और फिर सीबीआई ने मामले में स्पेशल कोर्ट के सामने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी और कहा कि मामले को बंद कर दिया जाए।

हालांकि स्पेशल कोर्ट ने पेश तथ्यों के आधार पर कहा कि जो साक्ष्य हैं वह पुख्ता हैं और मामले में तलवार दंपती को बतौर आरोपी समन जारी कर दिया। निचली अदालत ने तलवार दंपती को आरुषि और हेमराज की हत्या में उम्रकैद की सजा सुनाई थी जिसे तलवार दंपती ने हाईकोर्ट में चुनौती दी और हाईकोर्ट ने दोनों को बरी किया है। हाईकोर्ट ने कहा था कि परिस्थितिं जन्य साक्ष्यों के मुताबिक तलवार दंपती को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

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