तीन महीने निरन्तर इस मंत्र का जाप करने से खुश होते हैं कुबेर भगवान, बना देते हैं धनवान..!

धन की इच्छा सभी को होती है। ऐसा शायद ही कोई मनुष्य होगा जिसे धन की इच्छा ना हो, सभी लोग धन कमाने के लिए दिन रात कड़ी मेहनत करता है। क्योंकि धन के बिना भौतिक सुख-सुविधा पूरी नहीं हो सकती। इसलिए धन कमाने के लिए कड़ी परिश्रम करना और धन के देवता को प्रसन्न करना बहुत ही जरूरी है। भगवान कुबेर को धन के देवता माना जाता है।

इनकी पूजा से घर में सुख-समृद्धि के साथ व्यक्ति के पास अथाह धन दौलत होती है। कुबेर देव को खुश करने के लिए कुछ विशेष मंत्रों का जाप बहुत असरदार सिद्ध होता है। शास्त्रों और ग्रंथों में वर्णित हैं की यदि कोई निर्धन मनुष्य पूरे विधि-विधान व तन मन से भगवान कुबेर की पूजा करता है तो वह धनवान बन जाता है। धनपति कुबेर की जिस जातक पर कृपा होती है उस व्यक्ति के धन प्राप्ति के योग बनने लगते हैं।

धन प्राप्ति के लिए इस मंत्र का करें जाप

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।

मंत्र का जाप करते वक्त अपने सामने धनलक्ष्मी कौड़ी रखें और दक्षिण की ओर मुंह करके बैठें। तीन माह तक प्रतिदिन 108 बार इस मंत्र का जाप करें। तीन महीने पूरे होने के बाद इस कौड़ी को अपनी तिजोरी में रख दें, धीरे-धीरे कुबेर देव की कृपा आप पर होने लगेगी तथा आपकी तिजोरी कभी खाली नहीं रहेगी। ध्यान रहे इस मंत्र का जाप करते वक्त नियम बीच में नहीं टूटना चाहिए और न ही किसी को इसके बारे में बताना चाहिए। यदि मंत्र का जाप करते वक्त थोड़ी सी भी चूक हो जाती है तो ये जाप प्रभावकारी नहीं रहता है।

रावण संहिता के मुताबिक भगवान कुबेर की कृपा पाने के लिए ॐ श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम: मंत्र का जाप सबसे अधिक लाभकारी होता है। पूरे दिन में बस एक बार इस मंत्र के जाप से मनुष्य की सारी परेशानियां दूर हो सकती हैं। यदि इसका जाप लाल चंदन की माला से किया जाए तो ज्यादा शुभ होगा।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper