तुर्की की मुद्रा ‘लीरा’ ने ‘रुपये’ को जमींदोज कर दिया

दिल्ली ब्यूरो: तुर्की की मुद्रा लीरा ने भारतीय मुद्रा रुपये को जमींदोज कर दिया। रुपया सबसे निचले पायदान पर पहुँच गया। अब से पहले रुपये में ऐसी गिरावट नहीं देखी गयी थी। रुपया डॉलर के मुकाबले 70 के पार पहुंच गया है। इस गिरावट के बाद भारत में इस पर राजनीति शुरू हो गयी और कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने तीखा कटाक्ष यह कहते हुए किया कि मोदी सरकार ने वह कर दिखाया जो 70 साल में किसी ने नहीं किया।

सरकार को यह विपक्ष के उस हमले का जवाब था, जब गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए नरेंद्र मोदी यूपीए सरकार पर अक्सर गिरते रुपये को लेकर किया करते थे। उधर, सरकार की ओर से आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने इस पर सफाई दी और कहा कि इसके पीछे वैश्विक वजह हैं और घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे में सरकार के कहे अनुसार ही यह जानना जरूरी है कि हमारे रुपये को कौन गिरा रहा है?

रुपये में गिरावट की दो बड़ी वजह हैं – एक तुर्की की मुद्रा लीरा पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण बना दबाव और दूसरा अमेरिका के इकोनॉमी में लगातार आ रही मजबूती, जिससे डॉलर स्वत: मजबूत हो रहा है। बाजार के कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा ही ट्रेंड रहा तो छह महीने में डॉलर के मुकाबल रुपया 80 के पार पहुंच जाएगा।

लीरा संकट के पीछे कई कारण हैं जिनमें बाजार की ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की मांग को केंद्रीय बैंक द्वारा अस्वीकार किया जाना है। साथ ही अमेरिकी पादरी की गिरफ्तारी को लेकर अमेरिका द्वारा तुर्की पर प्रतिबंध लगाए जाने से पैदा हुआ तनाव अहम कारण है। हालांकि इस मामले में डोनाल्ड ट्रंप के रक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन की तुर्की के राजदूत सरदार किलिक से मुलाकात के बाद कुछ सकारात्मक उम्मीद बनी है।

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