‘तू डाल-डाल तो मैं पात-पात’ चलते ‘अजय’ और ‘शिवराज’

अरुण पटेल

किसी भी राज्य सरकार और प्रतिपक्ष के लिए अंतिम बजट सत्र अपने-आप में काफी मायने रखता है, क्योंकि यही अवसर होता है जब दोनों विधानसभा के अंदर एक-दूसरे की घेराबंदी करते हुए उस पर बढ़त बनाने की कोशिश करते हैं। सरकार अंतिम वर्ष में मतदाताओं का दिल जीतने के लिए क्या कर सकती और कितने सुनहरे सपने दिखा सकती है और विपक्ष उसकी घेराबंदी करके उसके इर्दगिर्द कैसे संदेह का कुहासा पैदा कर सकता है, दोनों इसकी भरपूर कोशिश करते हैं। भाजपा पर जुमलों और नारों की राजनीति कर बढ़त लेने का जोरशोर से आरोप लगता रहा है लेकिन अब उसका मुकाबला करने के लिए कांग्रेस भी पीछे नहीं है। यह इस बात से पता चलता है कि नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने विधानसभा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घोषणा-वीर और राज्य सरकार को 6-7 महीने का मेहमान ही बता डाला। जुमलों के साथ इसी दिन कांग्रेसियों ने एक अवसर पर जय-जय श्रीराम के नारे भी लगाये। अजय सिंह ने 14 साल पूर्व जैसे हालात होने का हवाला देते हुए सरकार को हर मोर्चे पर फिसड्डी रहने का आरोप लगाया, तो वहीं प्रत्युत्तर में मुख्यमंत्री ने यह कहते हुए कि ऐसा भाषण दोगे तो कोई भरोसा नहीं करेगा, अजय सिंह और प्रतिपक्ष को आईना दिखाने की कोशिश की। अजय सिंह ने जहां राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला तो वहीं शिवराज ने भी अपने ही अंदाज में जोरदार उत्तर दिया। इस प्रकार ‘तू डाल-डाल तो मैं पात-पात’ नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चल रहे हैं। देखने की बात यही होगी कि 2018 के विधानसभा चुनाव के नतीजों में प्रदेश की जनता किसे डाल-डाल और किसे पात-पात चलने वाला नेता मानती है।

राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रस्तुत कृतज्ञता ज्ञापन पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी की तर्ज पर अजय सिंह ने भी ‘फोर-पी’ का हवाला देते हुए भाजपा सरकार की घेराबंदी की। फोर-पी का अर्थ उन्होंने पैसा (धन), प्रचार (आयोजन), प्रपंच (इवेन्ट यानी नर्मदा यात्रा) और पाखंड (एकात्म यात्रा) को बताया। अजय सिंह का कहना था कि मुख्यमंत्री मार्केटिंग गुरु हैं, उन्हें तो लालू यादव की तरह हार्वर्ड विश्वविद्यालय में भाषण देना चाहिए। नर्मदा सेवा यात्रा पर 1870 करोड़ रुपये की फिजूलखर्ची हुई है। अमरकंटक में केवल समापन आयोजन पर ही 400 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अजय सिंह ने शिवराज को छोटे भैया कहा था तो वहीं शिवराज ने भी उसी अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि बड़े भैया हम तो कार्यक्रम करेंगे। अपनी सरकार की विभिन्न उपलब्धियों तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की लंबी फेहरिस्त विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को कार्यक्रम कर उनके खाते में पैसा डालेंगे और खाना भी खिलायेंगे। एक तरफ नेता प्रतिपक्ष ने पहले जैसे हालात होने की बात की तो मुख्यमंत्री ने भी कांग्रेस की तत्कालीन सरकार की कमियां गिनाते हुए कहा कि सारे काम करने में समय लगता है और तुलनात्मक रूप से उन्होंने दस साल की (दिग्विजय सिंह की) कांग्रेस सरकार से भाजपा सरकार को बेहतर निरूपित किया। शिवराज ने कहा कि भूतकाल की बात किए बिना वर्तमान सरकार की उपलब्धियां नहीं आंकी जा सकतीं। प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी बढ़ी है।

मुख्यमंत्री की नर्मदा सेवा यात्रा कांग्रेस के निशाने पर है, इसका उल्लेख अजय सिंह ने इस यात्रा पर खर्च हुई धनराशि के आंकड़ों के हवाले से किया तो सदन के बाहर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा की आध्यात्मिक और धार्मिक यात्रा से शिवराज की नर्मदा सेवा यात्रा की तुलना अक्सर होती है और इसे शाही यात्रा निरूपित किया जाता है। नर्मदा सेवा यात्रा पर हुए खर्च का ब्यौरा देते हुए शिवराज ने कहा कि 18 करोड़ रुपये खर्च हुए आपने पता नहीं कैसे 1800 करोड़ का हिसाब लगा लिया। अपनी यात्रा के औचित्य को प्रतिपादित करते हुए उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण के लिए लोगों को जगाने निकले तो कोई अपराध नहीं किया। गुजरात को नर्मदा का पानी उसके हिस्से के अतिरिक्त एक बूंद भी नहीं दिया जाएगा। अजय सिंह ने प्रचार और प्रपंच की सरकार निरूपित किया था तो इसका उत्तर देते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि प्रचार जरूरी है इसलिए एक और नदी महोत्सव का कार्यक्रम करने वाले हैं।

अजय सिंह ने आर्थिक सर्वेक्षण, नीति आयोग और मानव सूचकांक की रिपोर्टों का हवाला देते हुए सरकार को हर मोर्चे पर फिसड्डी बताया और कहा कि हर क्षेत्र में बदहाली है, कर्मचारी नाराज हैं, बेरोजगारी दो साल में 53 फीसदी बढ़ी है। भोपाल में 1.26 लाख बेरोजगार हैं। 9 हजार पटवारियों के पदों के लिए 10 लाख आवेदन इसका प्रमाण है। उनका आरोप था कि शिक्षा के हालात प्रदेश में बदतर हैं, 10 हजार ऐसे स्कूल हैं जहां एक भी अध्यापक नहीं है। 18 हजार स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं और पिछले चार वर्षों में पठन-पाठन का स्तर 80 प्रतिशत से गिरकर 32 प्रतिशत रह गया है। फिजूलखर्ची, शिक्षा, कृषि, रोजगार, कानून व्यवस्था, कुपोषण, स्वास्थ्य एवं मातृ-शिश्ाु मृत्यु जैसे मुद्दों को लेकर भी उन्होंने सरकार की अपने तईं घेराबंदी की। उनका आरोप था कि पठन-पाठन, महिला सुरक्षा, बिजली व कानून व्यवस्था बनाये रखने में अन्य राज्यों से मध्यप्रदेश काफी पीछे है। प्रदेश में इनवेस्टर समिट का खूब प्रचार हुआ लेकिन जमीन पर निवेश नहीं दिख रहा है। आईटी पार्क में सुविधा न मिलने पर 20 कंपनियां वापस लौट गयीं और हम महंगी बिजली खरीदने में लगे हैं। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में हर दिन 92 बच्चे मर रहे हैं। पोषण आहार से दलिया गायब होने से ऐसा हो रहा है। इस पर मुख्यमंत्री का कहना था कि कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव आया है, सिंचाई सुविधा बढ़ी है, आने वाले सालों में 60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। कर्मचारी आंदोलन का हवाला देते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों की सभी वाजिब मांगें पूरी की जायेंगी। आरक्षक, पटवारी, पंचायत सचिव के वेतनमान का उदाहरण देते हुए शिवराज ने कहा कि जो देने वाला है कर्मचारी उससे ही मांगेंगे। बदहाल शिक्षा के आरोपों पर विपक्ष को आईना दिखाते हुए शिवराज ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जीरो बजट पर स्कूल खोले, हमने वहां भवन बनवाये, मेधावी विद्यार्थी योजना से बच्चों की फीस सरकार भर रही है। बेरोजगारी के आरोप पर मुख्यमंत्री का कहना था कि हमारी पूरी कोशिश है कि सरकारी नौकरी में मध्यप्रदेश के लोगों को प्राथमिकता मिले। इसके लिए हमने 40 साल की उम्र तय की थी, हालांकि कोर्ट केस हुए हैं, कुछ बाधाएं आती हैं।

भाजपा जहां सदन के अंदर और बाहर भगवान राम के नारे लगाने से गुरेज नहीं करती थी तो वहीं अब कांग्रेस भी उसी राह पर चल पड़ी है और अपने साफ्ट हिंदुत्व के एजेंडे के तहत वह भी राम का नाम खुलकर लेने लगी है। चित्रकूट का उपचुनाव जीतने के बाद कांग्रेस के विजय जुलूस में जय श्रीराम के नारे लगाये गये थे तो मुंगावली और कोलारस से नवनिर्वाचित विधायकों के शपथग्रहण के बाद सदन के अंदर जय-जय श्रीराम के नारे लगे। नारे लगाने वालों में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी शामिल थे। जब नेता प्रतिपक्ष ही नारे लगा रहे थे तब अन्य विधायक कहां पीछे रहने वाले थे। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक बाबूलाल गौर ऐसे अवसरों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और तंज कसने से कहां चूकते हैं। उन्होंने जय-जय श्रीराम के नारे पर कहा कि “बड़ी देर भई नंदलाला’’। कांग्रेस के नव-निर्वाचित विधायक महेंद्र सिंह यादव और बृजेंद्र सिंह यादव की सदन के बाहर प्रतिक्रिया थी कि वे अगली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को देखना चाहते हैं। उनका आशावाद था कि अगली बार कांग्रेस सरकार बनेगी और सिंधिया मुख्यमंत्री होंगे। 2018 के विधानसभा चुनाव के पूर्व सेमीफायनल के रूप में लड़े गये इन उपचुनावों में ‘अबकी बार सिंधिया सरकार’ के नारे लगते रहे और सिंधिया भी कहते रहे कि ‘अगली बार कांग्रेस सरकार’। राजधानी भोपाल में आदिवासी विकास परिषद की बैठक स्थल हिंदी भवन की दीवार पर लगे पोस्टरों में लिखा था कि ‘अबकी बार भूरिया सरकार’ यानी पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शामिल हो गए हैं। हालांकि इस पोस्टर से होने वाले नुकसान को भांपते हुए आदिवासी विकास परिषद ने खुद को दूर कर लिया है। कांतिलाल भूरिया को भी इसमें भाजपा की साजिश नजर आई और उन्होंने कहा कि उन्हीं लोगों ने आकर पोस्टर लगा दिए। भाजपा सरकार में आदिवासियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है, मैं बैठक में था और पोस्टर परिषद ने नहीं लगाये हैं। कांग्रेस आलाकमान फिलहाल शिवराज के मुकाबले चेहरे को लेकर उहापोह में है और यदि कोई फैसला नहीं होता या बिना चेहरे के चुनाव मैदान में जाने की अधिकृत घोषणा नहीं होती, तब तक हो सकता है कि आने वाले समय में मध्यप्रदेश में अलग-अलग अंचलों में चार-पांच और कांग्रेस सरकारों के पोस्टर लग जायें।

सुबह सबेरे से साभार

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