तो एमपी-छत्तीसगढ़ में भाजपा को ऐसी पटखनी देगी कांग्रेस

नई दिल्ली: संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(यूपीए) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति के तहत ही बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में बसपा प्रमुख मायावती को गले लगाया था।

दरअसल कांग्रेस की सम्भावित रणनीति आगामी तीन राज्यों (राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़) में विधानसभा चुनावों पर है। ख़ास तौर पर मध्यप्रदेश(एमपी) और छत्तीसगढ़ में पार्टी बसपा के साथ मिलकर सत्तारूढ़ भाजपा को पटखनी दे सत्ता हासिल करना चाहती है। वहीं, एमपी में 29 और छतीसगढ़ में 11 लोकसभा सीटें है और कुल 40 सीटों में अधिकतर पर राज्य में सत्ताधारी दल ही विजय हासिल करता रहा है, इसलिए यहां से 2019 का भी रास्ता खुलने की कांग्रेस को उम्मीद है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, एमपी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कांग्रेस बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर शत-प्रतिशत जीत का दावा नेतृत्व के समक्ष किया है। इसका प्रमुख कारण इन राज्यों में बसपा की निर्णायक मौजूदगी है, जिसमें कांग्रेस को आशा की किरण नजर आ रही है। कांग्रेस नेता बसपा प्रमुख मायावती से एमपी और छत्तीसगढ़ में गठबंधन पर चर्चा शुरू कर चुके हैं।

इसी सिलसिले में हिन्दुस्थान समाचार ने कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा से जब इस गठबंधन को लेकर सवाल किए तो वे खुलकर कुछ नहीं बोले लेकिन संभावनाओं से इनकार भी नहीं किया।

मध्यप्रदेश के 2013 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को देखा जाए तो कुल 230 सीटों में से भाजपा को 165 सीटें मिली थीं और उसका वोट प्रतिशत क़रीब 44.88 फ़ीसदी था। वहीं, कांग्रेस को 36.38 फ़ीसदी वोट शेयर के साथ 58 सीटों पर ही जीत मिली थी।

वहीं बसपा को 4 सीटों पर जीत मिली थी लेकिन उसका वोट शेयर 6.43 फ़ीसदी था। इसके अलावा, बसपा 11 सीटों पर तीसरे नंबर पर भी रही थी। इन सभी सीटों पर बसपा उम्मीदवारों ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। ऐसे में कांग्रेस और बसपा का अगर गठजोड़ होता है तो भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।

दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ के आंकड़े भी गठबंधन का संकेत दे रहे हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को यहां कुल 90 में से 49 सीटों पर जीत मिली थी। भाजपा को 41 फ़ीसदी वोट मिला था, जबकि कांग्रेस को 40.3 फ़ीसदी वोट शेयर के साथ महज 39 सीटें ही मिल पाई थीं। यहां भी बसपा को 4.3 फ़ीसदी वोट शेयर के साथ एक सीट मिली थी।

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