दंतेवाड़ा में डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में दो नक्सली ढेर

दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने मुठभेड़ के दौरान दो नक्सलियों को मार गिराया है। इस एंटी नक्सल ऑपरेशन की खास बात यह रही कि महिलाओं ने भी कमांडो के रूप में डीआरजी के लड़ाकों का साथ दिया। महिला लड़ाकों के इस समूह का नामकरण दंतेश्वरी लड़ाके के रूप में किया गया है, जो राज्य की पहली महिला डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की टीम है।

दंतेवाड़ा के अरनपुर थाना क्षेत्र के पास गोंदरस जंगल में बुधवार तड़के करीब 5 बजे नक्सलियों और डीआरजी और एसटीएफ के संयुक्त टीम के बीच मुठभेड़ में 2 नक्सलियों को मार गिराया गया। उनके पास से एक इन्सास राइफल और गोला-बारूद के साथ 12 बोर का एक हथियार और अन्य खतरनाक सामग्री बरामद की गई है। दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव ने बताया इस मुठभेड़ में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड फीमेल कमांडोज (दंतेश्वरी लड़ाकों) ने भी हिस्सा लिया।

इस पलटन में नक्सल कैडर या फिर सरेंडर किए हुए नक्सलियों की पत्नियों को शामिल किया जाता है। इस टीम में कुल 30 महिलाएं हैं, जिन्हें हर तरह का प्रशिक्षण दिया गया है। राज्य के धुर नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले की सुशीला कारम कुछ समय पहले नक्सलियों के साथ पुलिस के खिलाफ लड़ती थी। इस दौरान कारम ने कई घटनाओं में नक्सलियों का साथ दिया, लेकिन जब वह माओवाद की खोखली विचारधारा के नाम पर खून खराबे से तंग आ गई तब पति के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अब वह दंतेश्वरी माई की लड़ाका हैं।

दंतेश्वरी देवी दंतेवाड़ा की देवी है और यहां उनका भव्य मंदिर है। माना जाता है कि दंतेश्वरी माई क्षेत्र के लोगों की रक्षा करती हैं। दंतेश्वरी देवी के नाम से दंतेवाड़ा पुलिस ने ‘दंतेश्वरी लड़ाके’ का समूह निर्मित किया है, जो राज्य की पहली महिला डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की टीम है। दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव बताते हैं कि दंतेवाड़ा पुलिस ने महिला कमांडो ‘दंतेश्वरी लड़ाके’ का गठन किया है जो पुरुष कमांडो के साथ मिलकर नक्सल विरोधी अभियान को अंजाम दे रही हैं।

पल्लव बताते हैं कि यह राज्य का पहला डीआरजी प्लाटून है जिसमें सभी महिलाएं हैं। इसमें शामिल 30 महिलाओं में से 10 आत्मसमर्पण कर चुकी महिला नक्सली हैं, जो आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की पत्नी हैं। वहीं 10 महिला कमांडो सहायक आरक्षक हैं। यह पूर्व में सलवा जुडूम आंदोलन की हिस्सा थीं। पुलिस अधीक्षक ने बताया दंतेवाड़ा में डीआरजी के पांच प्लाटून हैं और अब छठी प्लाटून महिलाओं की है, जिसका नेतृत्व पुलिस उपअधीक्षक (डीएसपी) दिनेश्वरी नंद कर रही हैं।

राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में डीआरजी के दल को सबसे तेज माना जाता है। यह दल स्थानीय युवा और आत्मसमर्पित नक्सलियों का समूह है, जो यहां की भौगोलिक स्थिति से भलीभांति परिचित हैं। डीआरजी ने पिछले कुछ वर्षों में नक्सल विरोधी कई अभियानों में सफलता पाई है और यह दल अब नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबल का बड़ा हथियार है। डीआरजी का उद्देश्य अपनी खोई हुई भूमि को फिर से प्राप्त करना और इसे माओवादी हिंसा से मुक्त कराना है।

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