दक्षिणपंथी नेताओं में वाजपेयी का सेकुलर चेहरा

दिल्ली ब्यूरो: दक्षिणपंथी राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का चेहरा बाकी से अलग है। वे दक्षिणपंथी राजनीति के सेकुलर चेहरा रहे हैं। उनका उदारवादी चेहरा तमाम दक्षिणपंथी नेताओं पर भरी है और कही कहीं तो उन सेकुलर जमात पर भी भारी जिनकी राजनीति रात और दिन के हिसाब से बदलती रही है।

अटल की तबीयत ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। एम्स के मुताबिक, बीते 24 घंटे में उनकी हालत काफी बिगड़ चुकी है। वाजपेयी 11 जून को किडनी, नली में संक्रमण, सीने में जकड़न और पेशाब की नली में संक्रमण होने के चलते एम्स में भर्ती कराए गए थे। एम्स की ओर से गुरूवार को जारी किए हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक, ‘दुर्भाग्यवश पिछले 24 घंटों में उनकी हालात ज्यादा बिगड़ गई है। उनकी हालत नाजुक है और वह जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं।

आइए आपको बताते हैं भारतीय राजनीति में क्यों सबसे खास और अलग रहे हैं अटल बिहारी वाजपेयी। अटल बिहारी वाजपेयी अन्य सभी दक्षिणपंथी नेताओं की तुलना में ज्यादा सेकुलर माने जाते रहे। उनकी प्रशंसा समूचा विपक्ष भी करता था। ये अटल बिहारी वाजपेयी के सेकुलर नेतृत्व का ही कमाल था कि राजग ने 23 दलों के साथ सरकार बनाई और अपना कार्यकाल भी पूरा किया।

विदेश मंत्री के तौर पर अटल बिहारी वाजपेयी ने सन 1977 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण दिया। ये देश के लिए गौरवपूर्ण क्षण था. जब देश की राजभाषा संयुक्त राष्ट्र संघ में गूंजी। ये वो एक यादगार लम्हा था जो इतिहास में हमेशा रहेगा. पोखरन परमाणु परीक्षण: साल 1998 में पोखरन में परमाणु धमाका भारतीय इतिहास का सबसे गौरवपूर्ण क्षण है। वाजपेयी जी की अगुवाई में देश ने परमाणु धमाका किया और सीआईए तक को भनक नहीं लगी ये वाजपेयी जी की हिम्मत की ही बात थी, कि उन्होंने तमाम अंतरराष्ट्रीय दबावों को दरकिनार कर दिया।

भारत-पाकिस्तान में तनातनी के बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी का पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ से हाथ मिलाना बेहद अहम लम्हा रहा। अटल बिहारी वाजपेयी के इस कदम से भारत-पाक संबंध को पुनर्जीवित किया।

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