दिल्ली में गैर कोरोना मरीजों को नहीं मिल रही दवा, हाईकोर्ट ने केंद्र और एम्स से मांगा जवाब

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में गैर कोरोना मरीजों को फार्मेसी से दवा न मिलने के मामले में संस्थान और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि लॉकडाउन के बाद से गैर कोरोना मरीजों को एम्स की फार्मेसी से दवा मिलनी बंद हो गई है। याचिका में दावा किया गया है कि देश के अलग-अलग राज्य से इलाज के लिए एम्स पहुंचने वाले ये मरीज फिलहाल रैन बसेरे में रहने के लिए मजबूर हैं। लोगों से पहले इन सभी को इनकी फार्मेसी से दवाइयां मिलती थीं, लेकिन मार्च में हुए लॉकडाउन के बाद से इन लोगों को दवाइयां मिलनी बंद हो चुकी हैं।

हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान एम्स ने अपना पक्ष कोर्ट में रखते हुए कहा कि लॉकडाउन के बाद से ही फार्मेसी में काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी एम्स तक नहीं आ पा रहे हैं। इसका सीधा असर दवाइयों के वितरण पर पड़ा है। हालांकि एम्स की तरफ से कोर्ट में साफ किया गया कि कैंसर और एड्स के मरीजों को नियमित दवाइयां दी जा रहीं है। लेकिन बहुत सीमित स्टाफ फार्मेसी में होने के कारण सभी मरीजों को दवाइयां नहीं मिल पा रही है। याचिका में कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि लॉकडाउन के चलते जिन मरीजों को दवाइयां नहीं मिल पा रही है, उनके लिए कुछ वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, जिससे उन्हें दवाइयां मिल सके।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इलाज और दवाइयों को लेकर एक और याचिका लंबित है। ऐसे में दोनों याचिकाओं को हाई कोर्ट की तरफ से टैग कर दिया गया है, यानी दोनों ही याचिकाओं पर कोर्ट आगे एक साथ सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार और एम्स को इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में 8 मई तक अपना जवाब दाखिल करना होगा। 8 मई को कोर्ट इस मामले में दोबारा सुनवाई करेगा। दिल्ली हाई कोर्ट में ये जनहित याचिका रचना मलिक की तरफ से दाखिल की गई है।

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