दिल्ली सरकार के रुख से लाखों लोगों को झटका, सिर्फ वोटरों को ही मिलेगा मुफ्त इलाज

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आप भले ही वर्षों से रहते हों, यहीं पर नौकरी व व्यवसाय करते हों और टैक्स भी चुकाते हों परंतु यदि आपके पास यहां का मतदाता पहचान पत्र नहीं तो आप मुफ्त इलाज के हकदार नहीं हैं। यह मानना है दिल्ली सरकार का। इसका प्रमाण यह है कि दिल्ली का मतदाता पहचान पत्र नहीं होने पर सरकार के रेफरल योजना के तहत मुफ्त जांच व मुफ्त सर्जरी की सुविधा नहीं मिल पाएगी। दिल्ली सरकार के रोहिणी स्थित अंबेडकर अस्पताल में एक बुजुर्ग मरीज को सिर्फ इसलिए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज रेफर किया, क्योंकि उनके पास दिल्ली का पहचान पत्र नहीं था। इस मामले पर एम्स के डॉक्टरों ने आश्चर्य जाहिर किया है।

एम्स के वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर व रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विजय गुर्जर ने कहा कि एम्स में मरीजों की पहले से ही भीड़ है। दिल्ली का पहचान पत्र नहीं होने पर सिर्फ सीटी स्कैन जांच के लिए एम्स में बुजुर्ग मरीज को रेफर कर देना हैरानी की बात है। साथ ही क्षेत्रीयता, जाति व धर्म के आधार पर मरीजों के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। अस्पताल पहुंचने वाले हर मरीज को इलाज का अधिकार होना चाहिए। रोहिणी सेक्टर 4 के नजदीक विजय विहार निवासी योगेंद्र (40) ने कहा कि वह दिल्ली में रिक्शा चलाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं।

उनके पिता ओमप्रकाश शर्मा के यूरीन ब्लाडर में मास (छोटा ट्यूमर) है। इस वजह से यूरीन से ब्लड निकलता है। अंबेडकर अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। वह बुधवार को सर्जरी के लिए तारीख लेने अस्पताल गए थे। वहां डॉक्टर ने आधार कार्ड की मांग की। साथ ही डॉक्टर ने सीटी स्कैन जांच की सलाह दी तथा दिल्ली का पहचान पत्र नहीं होने पर एम्स या सफदरजंग अस्पताल में इलाज कराने की सलाह देकर रेफर कर दिया। डॉक्टर ने बाकायदा ओपीडी कार्ड पर यह लिखा है कि मरीज के पास दिल्ली का कोई पहचान पत्र नहीं है इसलिए उन्हें रेफर किया है।

इस घटनाक्रम के बीच रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने 30 जनवरी 2018 को निर्देश जारी कर सीटी स्कैन, एमआरआइ इत्यादि की मुफ्त जांच व प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त सर्जरी के नियम में बदलाव किया है। विभाग ने आदेश दिया है कि यह सुविधा पाने के लिए मरीज के पास दिल्ली का मतदाता पहचान पत्र होना अनिवार्य है। मतदाता पहचान पत्र एक दिसंबर 2017 तक जारी होना चाहिए। आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। आधार का इस्तेमाल सिर्फ बायोमीट्रिक ट्रैकिंग के लिए होगा। वहीं, 18 साल से कम उम्र वाले बच्चों को यह सुविधा उनके जन्म प्रमाण पत्र या माता-पिता के वोटर कार्ड के आधार पर मिल सकेगी।

अंबेडकर अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुनीता महाजन ने कहा कि अस्पताल में ओपीडी मरीजों के लिए सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है। दिल्ली सरकार के रेफरल योजना के तहत निजी लैबों में मुफ्त जांच कराई जाती है। यह सुविधा सिर्फ दिल्ली के मरीजों के लिए है। मरीज का पहचान पत्र देखकर नजदीकी सेंटरों में रेफर किया जाता है। मरीज के दिल्ली का बाशिंदा नहीं होने पर बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है, जहां सीटी स्कैन व एमआरआइ की सुविधा है, इसलिए मरीज को एम्स में रेफर किया होगा। उन्होंने माना कि नियमों में बदलाव किया है और पहचान के लिए मतदाता पहचान पत्र होना जरूरी है। इस बाबत दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय के महानिदेशक डॉ. कीर्ति भूषण ने कहा कि यदि ऐसा कोई आदेश हुआ है तो उसमें बदलाव किया जाएगा।

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