दिल्ली सावधान ! संसद को घेरने आ रहे हैं एक करोड़ आदिवासी

संसद का ऐतिहासिक घेराव होने जा रहा है। ऐसा घेराव आजतक किसी ने नहीं देखा होगा। देश भर के आदिवासी अपनी विभिन्न मांगो को लेकर दिल्ली पहुँचने का आह्वान कर चुके हैं। एक अप्रैल से पांच अप्रैल के बीच संसद के सामने देश के आदिवासी अपनी मांग रखेंगे और आर पार की लड़ाई लड़ेंगे। माना जा रहा है कि इस विशाल आदिवासी बैठक में एक करोड़ लोग शामिल होंगे। आदिवासियों के इस आह्वान के बाद केंद्र की मोदी सरकार भी सकते में आ गयी है। जिस तरह के दावे आदिवासियों की ओर से किये जा रहे हैं अगर वैसा ही हुआ तो दिल्ली की पूरी यातायात व्यवस्था ठप हो जायेगी और दिल्ली अथाह जान समूह से भर जाएगा।

खबर के मुताबिक़, जय आदिवासी युवा शक्ति का ‘जयस मिशन 2018’ के तहत एक से छह अप्रैल तक दिल्ली में संसद का घेराव किया जायेगा़। इसमें देश के 10 अनुसूचित राज्यों से एक करोड़ आदिवासी शामिल होंगे। झारखंड के रांची, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, खूंटी, लातेहार, हाजरीबाग, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, सिंहभूम, खरसावां, दुमका, देवघर, गोड्डा, साहेबगंज, पाकुड़ व अन्य जगहों से भारी संख्या में लोग 29 मार्च से रवाना होंगे़। यह जानकारी जयस के झारखंड प्रभारी संजय पाहन ने दी़ है।

पाहन के मुताबिक़, संसद का यह घेराव ऐतिहासिक होगा़। इसमें अनुसूचित राज्यों में पांचवीं अनुसूची का शतप्रतिशत अनुपालन, कुरमी-तेली को झारखंड/बंगाल में एसटी का दर्जा देने के प्रस्ताव को रद्द करने, अनुसूचित जाति-जनजातीय अत्याचार निरोधक अधिनियम पर सर्वोच्च न्यायालय के आये निर्देश पर केंद्र सरकार से पुनर्विचार याचिका दायर करने, संविधान में अनुसूचित जनजाति शब्द के स्थान पर आदिवासी लिखने, देश के विभिन्न राज्यों में विलुप्त हो रहे बेंगा जनजाति, असुर जनजाति, पहड़िया जनजाति, जारवा व ओंगा जनजाति का विकास व सुरक्षा सुनिश्चित करने, विश्व आदिवासी दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने आदि की मांगें की जायेंगी़। पाहन ने कहा है कि देश की सरकार आदिवासियों के लिए कुछ नहीं करती। पहन ने कहा कि हम आदिवासी है और आदिवासी ही कहलाना चाहते हैं।

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