दिवालिया होने के कगार पर पहुंचा अमेरिका !

लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो: अमेरिका घोर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। सरकार को चलाने के लिए उसके पास पैसे नहीं है और जिस तरह से वहाँ की राजनीति आगे बढ़ रही है उससे लगता है कि ट्रम्प सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती है। दरअसल यह सारा मामला आर्थिक विधेयक का दोनों सदनों में पास नहीं होने से हुया है। आर्थिक मंजूरी प्रदान करने वाला विधेयक प्रतिनिधि सभा में पारित हो गया है, लेकिन ऊपरी सदन सीनेट में पारित होना बाकी है। ऊपरी सदन में इस विधेयक का विरोध चल रहा है।

अगर यह विधेयक सीनेट से पारित नहीं हुआ तो आर्थिक मंजूरी के अभाव में देश में सरकारी कामकाज ठप हो जाएगा। अमेरिका में ‘शटडाउन’ की नौबत आ जाएगा यानी कई सरकारी विभाग बंद करने पड़ेंगे और लाखों कर्मचारियों को बगैर वेतन के घर बैठना पड़ेगा। कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो सकता है। पांच साल में दूसरी बार ऐसी स्थिति बनने के बाद आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका दिवालिएपन की ओर बढ़ रहा है।

आपको बता दें कि अमेरिका में एंटीडेफिशिएंसी एक्ट लागू है। इसके मुताबिक, पैसे की कमी होने पर संघीय एजेंसियों को अपना कामकाज रोकना पड़ता है। बजट न होने के कारण कर्मचारियों की छुट्टी कर दी जाती है और उन्हें वेतन भी नहीं दिया जाता। इस स्थिति में सरकार संघीय बजट लाती है, जिसे प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में पारित कराना जरूरी होता है।अभी अमेरिकी प्रशासन में 35 लाख कर्मचारी हैं। शटडाउन होने पर साढ़े आठ लाख कर्मचारी पहले ही दिन से घर बैठ जाएंगे। हालांकि जहां-जहां सैन्यकर्मियों की ड्यूटी लगी है, उन्हें नहीं हटाया जाएगा।

गौरतलब है कि अमेरिकी इतिहास में 1981, 1984, 1990, 1995-96 और 2013 में ऐसा हो चुका है। तब अमेरिका के पास खर्च करने के लिए पैसा नहीं बचा था। आखिरी सरकारी शटडाउन अक्टूबर 2013 में हुआ था, जो दो हफ्तों तक चला था और 8 लाख कर्मचारियों को इस दौरान घर बैठना पड़ा था। तब बराक ओबामा राष्ट्रपति थे। उम्मीद की जा रही है कि समय रहते ट्रम्प सरकार ऐसी स्थिति आने से पहले विधेयक को पास कराने की कोशिश करेंगे ताकि अमेरिका को आर्थिक संकट से बचाया जा सके।

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