दिवाली पर रखें वास्तु का ध्यान

लखनऊ: हमारे यहां ज्यादातर त्योहार किसी मंदिर, धार्मिक स्थल, नदियों के किनारे या किसी सार्वजनिक स्थल पर एकत्रित होकर सामूहिक रूप से मनाए जाते हैं। लेकिन सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की कामना के साथ दिवाली हम अपने घर पर ही मनाते हैं। ऐसे में, कामनापूर्ति के लिए घर भी महत्वपूर्ण हो जाता है। घर, यानी उसकी संरचना, उसका वास्तु। इसलिए आप दिवाली की खुशियों के साथ कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें।

– दीप पर्व के दौरान मुख्य द्वार पर रंगोली, साज-सज्जा के साथ ही दीपक जलाना शुभ ऊर्जाओं को आमंत्रण और उनके स्वागत की तरह होता है। ध्यान रखें कि मुख्य द्वार में कहीं छिद्र और दरार न हो और उसे खोलने एवं बंद करने में आवाज न आती हो। दरवाजे और खिड़कियों पर सरसों का तेल लगाकर उन पर स्वास्तिक चिह्न बनाएं और शुभ लाभ लिखें।
– दिवाली के लिए भवन की साफ-सफाई और लिपाई-पुताई की परंपरा है, क्योंकि दरारें, टूट-फूट, सीलन के निशान और बदरंगी दीवारें शुभ ऊर्जा को ग्रहण करने में असमर्थ होती हैं।
– पर्व के दौरान घर का वातावरण धूप-अगरबत्ती से सुगंधित करना चाहिए। अन्य दिनों में भी घर में किसी प्रकार की दुर्गंध न रहे।
– लक्ष्मी को आमंत्रित करने से पहले पुराने और अनुपयोगी सामानों की विदाई आवश्यक है। कबाड़ से मुक्ति पाने का सीधा संबंध आर्थिक प्रगति से है।
– वास्तु के अनुसार ईशान यानी उत्तर-पूर्व दिशा का पूजन कक्ष सर्वोत्तम होता है। दिवाली पूजा भी इसी पूजन कक्ष में या पूर्व-मध्य अथवा उत्तर-मध्य के किसी कक्ष में की जानी चाहिए। घर के मध्य भाग को ब्रह्म स्थान कहा जाता है। यहां भी पूजन कर सकते हैं। पूजा के समय पूर्व या पश्चिममुखी रहें।
– घर में लक्ष्मी को आमंत्रित करने के साथ ही उन्हें सहेजकर रखने के जतन करना भी महत्वपूर्ण है। इसलिए नकदी और गहने-जेवरात की अलमारियां दक्षिण या पश्चिम की दीवारों पर हों और उत्तर या पूर्व की ओर खुलें। ख्याल रहे, इन अलमारियों पर दर्पण न लगा हो।
– यदि आपके घर के आगे या उत्तर दिशा की ओर गड्ढ़ा है, तो उसे भरवाकर समतल करा दें। इससे वास्तु दोष दूर होगा।
– जिन लोगों के घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा की ओर है, उन्हें मुख्य द्वार पर पिरामिड या लक्ष्मी गणेश की तस्वीर लगानी चाहिए।
– दीपावली के मौके पर बहुत से लोग टीवी और फ्रिज की खरीदारी करते हैं। टीवी और फ्रिज को उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर मुख करके लगाएं।
– घर के दरवाजे पर मां लक्ष्मी के पैर का चिह्न जरूर लगाने चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि पैर की दिशा अंदर की तरफ होनी चाहिए। घर के दरवाजे पर चांदी का स्वस्तिक लगाना बेहद शुभ माना जाता है।
– पानी में नमक मिलाइए और इसे पूरे घर के कोने-कोने में छिड़किए। वास्तु के हिसाब से नमक घर की बुरी ऊर्जा को सोख लेता है।
– घर में उत्तर दिशा को कुबेर स्थान बोला जाता है। सुनिश्चित करें कि माता लक्ष्मी की मूर्ति यही पर रखी जाए और गणेश जी की मूर्ति उनके दाहिने हो। इसके अलावा मूर्तियों को लाल रंग के कपड़े में सजाइए।
– कहा जाता है कि बहता हुआ पानी घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा को अपने साथ बहा ले जाता है। ऐसे में आप भी अपने घर में कोई छोटा सा झरना लगाइए और यह झरना घर के उत्तर-पूर्व दिशा में लगा होना चाहिए।
– दिवाली से पहले घर में अष्ठमंगला का चिह्न जरूर लगाएं। अष्ठमंगला के ऊपर दरअसल कमल रखा जाता है और कमल पर मां लक्ष्मी विराजती हैं।
– अगर घर के दरवाजे पर रंगोली, स्वास्तिक या फिर ओम का चिह्न बना रहे हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि इन्हें घर के पूर्व और उत्तर में ही बनाएं।
– घर के दरवाजे पर एक ट्रे में पानी और फूल भरकर पूर्व और उत्तर दिशा की तरफ रखने से घर के मालिक को काफी फायदा होता है।

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