दीवालिया कंपनियां की जमीनों से पूरा हो सकता है ‘सबको आवास’ का सपना

मुंबई: दिवालिया हुई कंपनियां सरकार के सबको सस्ता घर देने के सपने को पूरा करने में सहायक हो सकती हैं। दिवालिया कंपनियों की उपयोग नहीं हुई औद्योगिक जमीनों को सस्ते मकान से जुड़ी योजनाओं में उपयोग किया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए राज्य सरकारों की सहमति जरूरी है। किफायती आवास की योजनाएं अगर ऐसी जमीनों पर बनाई जाती हैं, तो लोन रिकवर करने के तरीके खोज रहे बैंकों के अलावा समाज के गरीब तबके को भी घर मिलने का फायदा होगा।

पेंच यह है कि इंडस्ट्रियल जमीन का उपयोग आवासीय परियोजनाओं में नहीं हो सकता, इसीलिए सरकारों की सहमति जरूरी है। आम्रपाली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रुप से सभी खरीददारों को फ्लैट उपलब्ध कराने के प्लान को जमा करने का आदेश दिया है। एएए इन्सॉलवेंसी प्रफेशनल्स के फाउंडर अनिल गोयल ने कहा, ‘दिवालिया हुई कंपनियों की जमीनों को सस्ते मकानों से जुड़ी परियोजनाओं में इस्तेमाल करना बैंकों, कंपनियों और समाज के गरीब तबकों समेत सबके लिए बेहतर होगा। सरकार भी सस्ते मकानों के टारगेट को पूरा कर पाएगी।

कंपनी के वर्कर्स को भी घर ऑफर करने का विकल्प रहेगा। सरकार का टारगेट सन 2022 तक सभी के लिए घर उपलब्ध कराने का है। इस कदम से लोन देने वाले बैंकों को भी फायदा होगा, क्योंकि उन्हें औद्योगिक जमीन के लिए खरीददार मिल जाएंगे। महंगी इंडस्ट्रियल जमीन को बेचना आसान नहीं होता। ऑल इंडिया इन्सॉलवेंसी प्रोफेशनल्स असोसिएशन की सदस्य ममता बिनानी के मुताबिक, अगर ऐसा कदम उठाया जाता है, तो उसका बड़ा आर्थिक असर होगा। इससे नौकरियां पैदा भी होंगी और उन्हें बचाया भी जा सकेगा। सालाना एक से पांच लाख रुपये कमाने वाले लोगों के लिए 300 से 600 वर्ग फुट का फ्लैट सस्ते आवास के रूप में बनाया जाता है।

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