दुनिया को अपने आंचल में समेटती जा रही है हमारी राजभाषा हिंदी

नई दिल्ली: भारत की राजभाषा हिंदी दुनिया को अपने आंचल में समेटती जा रही है। दुनियाभर में हिंदी बोलने और समझने वाले लोगों की तादाद बढ़ने के साथ ही हिंदी तेजी से पूरी दुनिया में फैल रहा है। देश की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को समटकर रखने वाली हिंदी विश्व के माथे पर बिंदी की तरह चमक रही है।

दुनिया में हिंदी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत सरकार ने दस जनवरी,1975 को पहला विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर में आयोजित किया। इसमें 30 देशों से 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन की वर्षगांठ मनाने के लिए 2006 से हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।1975 से अबतक मॉरीशस,ब्रिटेन,अमेरिका,द.अफ्रीका सहित कई अन्य देशों में यह सम्मेलन आयोजित हुआ है।

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हिंदी शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द सिंधु से हुई। हिंदी के व्याकरण और शब्दों का आधार संस्कृत है। हिंदी का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है। संस्कृत का अपभ्रंश स्वरूर्प हिंदी का पहला स्वरूप कहा जाता है। देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी को 14 सितंबर,1949 में भारतीय संविधान में देश की राजभाषा का दर्जा दिया गया।

हिंदी जानने,समझने और बोलने वालों की बढ़ती संख्या के चलते अब दुनियाभर की वेबसाइट भी हिंदी को प्राथमिकता दे रही हैं। ई-मेल,ई-कॉमर्स, एसएमएस एवं अन्य इंटरनेट सेवाओं के इस्तेमाल के लिए हिंदी भाषा को भी प्रमुख विकल्प बनाया गया है।माइक्रोसॉफ्ट,गूगल व आईबीएम जैसी विश्वस्तरीय कंपनियां व्यापक बाजार और भारी मुनाफे के लिए हिंदी को बढावा दे रही हैं।

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