देवा मेला शबाब पर

लखनऊ: पुरी दुनिया को आपसी प्रेम भाई चारा और सदभाव का संदेश देने वाले महान सूफी संत हजरत हाजी सैय्यद वारिस अली शाह(रह) के कुल शरीफ की रस्म हजारो जायरीन की मौजूदगी मे अदा की गयी । इस दौरान कुल में भाग लेने के लिए देश के कोने कोने से बीते दिनो से हजारों अकीदत मंदो के आने का क्रम जारी था ।इससे पूर्व शनिवार को हजरत सैय्यद कुर्बान अली शाह दादामियॉ का ऐतिहासिक कुल हुआ था। जिसके बाद से देवा मेला पूरे शबाब पर था और वारिस पाक के चाहने वालो का देवॉ की सरजमीन पर ताता लगा लगा था।हजरत हाजी सैय्यद वारिस अली शाह (रह) के पिता दादामियॉ की याद मे लगने वाले एतिहासिक मेले के अवसर पर रविवार को यहाँ रात्रि भर आस्ताना ए आलिया के समा खाना,खानकाह हजरत कल्लन मियॉ व रिसमा खानो मे सूफियाना कव्वाली के बाद या वारिस के गगन भेदी नारों के बीच हजारों अकीदत मंदो के जन सैलाब की उपस्थिति मे वारिस पाक (रह) का कुल शरीफ संपन्न हुआ ।

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इस दौरान आस्ताना आलिया को खूबसूरत ढंग से सजाया गया था पुरा आस्ताना दूधिया रौशनी में नहाया हुआ है । हर तरफ वारिस पाक के दीवानो का सैलाब उमड़ता हुआ दिखायी दिया , सिरों पर चादरे और फूलो की डलिया लिए वारिस पाक के दीवानो की फौज पुरी रात दरबार वारिस में हाजिरी देकर अपनी मुरादें माँगती रही, इस दौरान भारी भीड़ के कारण लोगों को आस्ताना आलिया तक पहुँचाने में काफी समय लग रहा था।धार्मिक कार्यक्रमों से ओतप्रोत हुआ आस्ताना आलिया का समाखाना-बीतें दिनो से आस्ताना आलिया के समा खाने में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमो का आयोजन किया गया। रात्रि आस्ताना आलिया के समा खाना समेत हजरत सैय्यद कुर्बान अली शाह (दादा मियाँ) की दरगाह के सज्जादा नशीन हाजी सैय्यद उसमान गनी शाह और दीगर समा खनो में देश के विभिन्न स्थानो के अलावा स्थानीय मशहूर कव्वालो ने सूफी संत हजरत वारिस पाक की शान मे जोर दार सूफियाना कलाम पेश कर अकीदत मंदो को झूमने पर मजबूर कर दिया । इस दौरान वारिस पाक के दीवानो ने सरकार की शान मे कलाम सुनकर खूब पैसा कव्वालो को नजर किया ।

वारिस पाक के दीवाने पुरी रात जो जिस जगह पर था रौशनी में नहायी सरकार की दरगाह को निहारता रहा। यह मंजर देखते ही बन रहा था । कव्वालो के द्वारा वारिस पाक की शान में कलाम पेश करने का क्रम पुरी रात्रि जारी रहा । कव्वाल एक समा खाने से दूसरे समा खाने में सूफियाना कलाम पेश करते रहे जिसके कारण लाउड स्पीकरो की आवाज से पुरा कस्बा रात भर गूँजता रहा । वही मेला कार्तिक में शामिल होने के लिए विभिन्न स्थानो से हजारों अकीदत मंदो के आने का क्रम कुल शरीफ संपन होने से पूर्व तक जारी रहा ।उर्स में शामिल होने आये जायरीन को जहाँ जगह मिली वही अपना डेरा डाल दिया और वारिस बाबा की दरगाह को निहारता रहा ।

सोमवार की सुबह जैसे ही 4 बज के 13 मिनट हुआ कलाम पाक की तिलवात से वारिस पाक का कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसके बाद शिरनी आदि की नजर पेश करने के बाद मुल्क मे अमन सलामती के लिए दुआ की गयीं इसी के साथ वारिस पाक के कुल शरीफ की रस्म फजिर नमाज से पूर्व संपन्न हो गयी। कुल शरीफ की रस्म अदा होने के साथ ही आकीदतमंदो ने दरबार वारिस पाक में हाजिरी दी।

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