देश की आत्मा होते हैं नागरिक, न कि आयातित वोट बैंक: जेटली

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर एनआरसी के मुद्दे पर देश की संप्रभुत्ता के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि नागरिक किसी भी राष्ट्र की आत्मा होते हैं, न कि आयातित वोट बैंक। अरुण जेटली ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल की आलोचना करते हुए कहा कि असम के एनआरसी मामले में पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने जो कहा था, कांग्रेस अध्यक्ष का रूख इसके ठीक विपरीत है।

उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार का प्रमुख कर्त्तव्य अपनी सीमाओं की सुरक्षा करना, अपराध को रोकना और देश के नागरिकों का जीवन सुरक्षित बनाना होता है। जेटली ने कहा, ‘‘यह (कांग्रेस) अब भारत की संप्रभुत्ता के साथ समझौता कर रही है। राहुल गांधी और ममता बनर्जी जैसे नेताओं को यह महसूस करना चाहिए कि संप्रभुत्ता खेलने की चीज नहीं है।’’ केंद्रीय मंत्री ने पोस्ट में लिखा है, ‘‘संप्रभुत्ता और नागरिकता भारत की आत्मा है। आयातित वोट बैंक नहीं।’’

जेटली ने अपने इस पोस्ट का शीर्षक ‘‘राष्ट्रीय नागरिक पंजी बनाम वोट बैंक’’ रखा है। जेटली ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए कहा है कि वह बांग्लादेशी घुसपैठ पर अपना रूख बदल रही हैं। भाजपा नेता ने लिखा है, ‘‘हालांकि, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने विदेशियों को हटाने और उनके निर्वासन के लिए 1972 और 1985 में विशेष रूख अख्तियार किया था और अब राहुल गांधी इसके विपरित रूख अपना रहे हैं। कांग्रेस पार्टी अपने असली स्टैंड से पलट गई है।’’ जेटली ने कहा, ‘‘इसी तरह 2005 में भाजपा की सहयोगी रह चुकी सुश्री ममता बनर्जी ने भी इस पर खास रूख अपनाया था। संघीय मोर्चे के नेता के तौर पर अब वह इसके उलट बात कर रही हैं। क्या भारत की संप्रभुत्ता ऐसे चंचल दिमाग वालों और नाजुक हाथों द्वारा तय की जाएगी।’’

असम के 40 लाख लोगों के नाम एनआरसी के अंतिम मसौदे में नहीं है। प्रदेश में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए एनआरसी तैयार की जा रही है। एनआरसी का दूसरा मसौदा इस हफ्ते के शुरू में गुवाहाटी में प्रकाशित किया गया था। इस मुद्दे पर विपक्षी कांग्रेस और टीएमसी के सदस्यों ने तीन दिन से राज्यसभा नहीं चलने दी है। जेटली ने कहा कि क्षेत्र और नागरिक किसी भी संप्रभु देश के दो पहलू हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ऐतिहासिक रूप से दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने देश से प्रतिबद्धता जतायी थी।

उन्होंने कहा था कि 25 मार्च 1971 के बाद के प्रवासियों का पता लगाया जाएगा, उनकी पहचान कर उन्हें निर्वासित किया जाएगा। जेटली ने कहा 1971 से पहले कुछ प्रवासी उत्पीड़न के कारण भारत आए थे, लेकिन 1971 के बाद के सभी प्रवासियों के मामले में यह बात सही नहीं है, क्योंकि उन्होंने अवैध रूप से देश में प्रवेश किया था। राज्यसभा सांसद जेटली ने कहा एक तीसरी कैटेगरी भी है, जो न तो नागिरक हैं और न ही शरणार्थी हैं। वे यहां आर्थिक अवसरों की तलाश में आते हैं। ये लोग अवैध प्रवासी हैं। उनका प्रवेश देश के खिलाफ चुपचाप किया गया हमला है।’’

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