देश की आर्थिक स्थिति पर रघुराम राजन, अमर्त्य सेन और अभिजीत बनर्जी ने सरकार को दिए ये सुझाव

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की वजह से देश में लगे लॉक डाउन का आर्थिक गतिविधियों पर सबसे बुरा असर पड़ा है, 24 मार्च से देश में सब कुछ बंद है। भारत में पहले से ही अर्थव्यवस्था और नौकरियों को लेकर चिंता थी, जो कि अब कोरोना वायरस की वजह से और गहरा गई है। अर्थव्यवस्था को लेकर भारत के 3 बड़े अर्थशास्त्री आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन और नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी ने एक लेख में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई है और इसके इस लेख के माध्यम से कई सुझाव भी दिए हैं।

इसके अलावा कोरोना की वजह से देश में सब कुछ ठप पड़ा है जिससे बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी जा चुकी है, आने वाले समय में बेरोजगारी बहुत बड़ी समस्या बनने जा रही है, नौकरी ना होने की वजह से लोग लॉकडाउन तोड़कर भी काम करने जा रहे हैं। ऐसे में मजदूरों के लिए और उन लोगों के लिए जोखिम और भी बढ़ जाता है इसलिए सरकार को उनकी बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द कदम उठाने चाहिए।

देश में फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के स्टॉक भरे हुए हैं, मार्च 2020 तक एफसीआई के पास सात करोड़ टन का टॉक है। इसलिए सरकार को सबसे पहले गरीबों के पास इन अनाज को पहुंचा देना चाहिए। साथ ही किसानों के संकट को देखते हुए भी सरकार ने किसानों के स्टॉक खरीदने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं नेशनल इमरजेंसी के इस दौर में स्टॉक को खर्च करना सबसे जरूरी कदम है जिस पर सरकार पहले से ही काम कर रही है।

इन अर्थशास्त्रियों ने सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि 3 मई अगले 3 महीने तक प्रति व्यक्ति 5 किलो ग्राम अनाज देने के सरकार का ऐलान सराहनीय है, लेकिन इसे बढ़ाकर 6 महीने अनाज देने की जरूरत है। इसके साथ ही इनसे अर्थशास्त्रियों ने कहा कि गरीबों में कैस वितरण के लिए जनधन खाते और राशन के लिए राशन कार्ड के अलावा और ऊंचा उठकर सोचने की जरूरत है, क्योंकि देश में बड़ी संख्या ऐसी है जिनके पास यह सुविधाएं उपलब्ध नहीं है, इसके लिए उन्होंने झारखंड का उदाहरण दिया है जहां बड़ी संख्या में राशन कार्ड पेंडिंग है।

इसके अलावा शास्त्रियों ने स्कूल मिल को बच्चों के घर तक पहुंचाने की व्यवस्था और मजदूरों के घर के पास पब्लिक कैंटीन की व्यवस्था जैसी सुविधाओं की बात कही है। जिसे तुरंत एनजीओ की मदद से शुरू की जा सकती है। वहीं रवि की फसलें तैयार हैं इसी खरीदारी के बारे में भी सरकार को जल्द फैसला लेगा लेना होगा और इसके साथ ही सरकार किसानों को अगले फसल के लिए पैसे और खाद की जरूरत मुहैया करानी होगी, दुकानदारों को देखना होगा कि वह कैसे स्टॉक को पूरा करें।

इसके अलावा इन अर्थशास्त्रियों ने कहा कि राज्यों को केंद्र द्वारा मिले फंड समय पर मिलने चाहिए और राज्यों को गरीबों तक मदद पहुंचाने के लिए प्लान बनाना चाहिए इसके अलावा कुछ इंडस्ट्रीज को शख्त मदद की जरूरत है इसलिए सरकार को इनका भी मूल्यांकन करना चाहिए।

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