देश में कोरोना के मामले बढ़े, साउथ एशिया में संक्रमण रोकना बहुत मुश्किल : विशेषज्ञ

मुंबई: घातक कोरोना वायरस के संक्रमण ने तेजी से पूरी दुनिया में पैर पसार लिए है। गहरी चिंता का कारण बन चुके इस वायरस पर काबू पाने के लिए भारत में यात्रियों को कड़ी स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ रहा है। इस बीच देश में बढ़ते जा रहे कोरोना वायरस के मामलों को देखते हुए विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि दक्षिण एशिया में इस खतरनाक बीमारी से निपटना आसान नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहद घनी जनसंख्या वाले भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों में चिकित्सा का जो बुनियादी ढांचा है, उससे कोरोना के खिलाफ लड़ाई बड़ी कठिन साबित हो सकती है।

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में दुनिया की जनसंख्या का पांचवा हिस्सा रहता है। ऐसे में कोरोना पर काबू पाने के लिए मरीजों को जिस तरह के इंटेंसिव केयर की जरूरत होती है, उसके लिए इन देशों के मौजूदा हेल्थ सिस्टम को काफी संघर्ष करना पड़ सकता है। जॉर्ज इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ, नई दिल्ली के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विवेकानंद झा का कहना है कि जापान और चीन जैसे देशों ने कोरोना को लेकर जिस तरह का लॉकडाउन किया है, वैसा भारत जैसी सघन आबादी वाले देश में अच्छी परिस्थितियों में भी बहुत असंभव है।

वहीं, भारत सरकार ने दावा किया है कि उसने तकरीबन 10 लाख यात्रियों की बड़े-बड़े हवाई अड्डों पर जांच की है और सेपरेशन वॉर्ड्स भी स्थापित किए हैं। केंद्रीय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा का कहना है कि कोरोना वायरस एक चुनौती है। भारत सरकार प्राथमिक तौर पर इसका फैलाव रोकने में लगी है। हालांकि, भारत की एक बड़ी जनसंख्या देश के भीतर ही प्रवासी है, जो एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए रेल और सड़क मार्ग का इस्तेमाल करती है। ऐसे में किसी भी वायरस के फैलाव को रोकना एक बड़ा चैलेंज हो सकता है। भारत के अलावा पाकिस्तान में भी कोरोना के पांच मामले सामने आए हैं।

पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन के सचिव शाहिद मलिक ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि हमारे पास मानव संसाधन नहीं है। हमारे पास जरूरत के सामान भी नहीं है। इसके अलावा मौजूदा संसाधनों से हम किसी बड़ी इमरजेंसी से निपटने में भी सक्षम नहीं हैं। बांग्लादेश में अभी तक कोरोना का एक भी मामला देखने में नहीं आया है लेकिन सिंगापुर में पांच बांग्लादेशी मजदूरों में कोरोना की पुष्टि हुई है।

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