दो शिक्षिकाओं ने निभाया इंसानियत का फर्ज़, 6 वर्षों में बेघरों के लिए बनवा चुकी हैं 150 घर

आज भी कई ऐसी खबरें सामने आ ही जाती हैं जिन्हें देखकर एक बात तो साफ हो जाती है कि आज भी इंसानियत ज़िंदा है। आज भी हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण हैं जो अपने सराहनीय कार्यों से इंसानियत की मिसाल को पेश कर रहे हैं। आज हम आपको दो ऐसी ही महिला शिक्षकों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपने सराहनीय कार्यों से अनेकों परिवारों के सिर पर छत प्रदान की है। आज ये दो महिला शिक्षक बेघरों का सबसे बड़ा सहारा बन चुकी हैं। हर कोई इनके सराहनीय कार्यों पर गर्व कर रहा है। आइए जानते हैं इस खबर को विस्तार से।

केरल की दो महिला शिक्षकों का सराहनीय कार्य

हम सब जानते हैं कि हमारे देश में आज भी ऐसे कई लोग हैं जिनके सिर पर छत नहीं हैं। जो आज भी बेघर हैं। लेकिन देश में कुछ लोग इन जरूरतमंदों का सहारा बने हुए हैं जो इनकी मदद करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। आज हम आपको दो ऐसी महिला शिक्षकों के बारे में ही बताने जा रहे हैं जो बेघरों के लिए घर बनवाने का नेक काम कर रही हैं। इनमें से एक का नाम लिस्सी चक्कलक्कल है और दूसरी लिली पॉल हैं। लिस्सी केरल के एक स्कूल की प्रिंसिपल भी हैं।

ऐसा शुरू हुआ घर बनवाने का सिलसिला

दरअसल आज से 6 वर्ष पहले लिस्सी को इस बात की जानकारी हुई कि उनके स्कूल की 8वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक बच्ची के पास घर नहीं है और उसके पिता भी नहीं हैं। इसके बाद लिस्सी और लिली ने ही बच्ची के लिए घर बनवाने का फैसला किया। पड़ोसियों, अन्य शिक्षकों और सम्पन्न छात्रों से मदद लेकर दोनों ने बच्ची के लिए 600 वर्ग फुट में घर बनवाया। इसके बाद दोनों को अन्य ऐसे कई बच्चों के बारे में पता चला जो बेघर हैं। उसी दिन से दोनों ने इस नेक काम को करने का फैसला कर लिया।

अब तक बनवा चुकी हैं 150 घर

अब दोनों ने बेघरों के लिए घर बनवाने का मिशन शुरू कर दिया है। दोनों टीचर्स ने शुभचिंतकों, स्थानीय लोगों से बात की। कई संस्थाओं और संगठनों से भी टीचर्स ने मदद मांगी और उन्हें मदद मिली भी। घर बनाने वाले श्रमिकों ने भी इस नेक काम में अपना योगदान दिया। 2014 में दोनों टीचर्स ने स्कूल के प्लेटिनम जुबली समारोह के उपलक्ष्य में हाउस चैलेंजिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत की। ANI की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 6 वर्षों में दोनों टीचर्स बेघरों के लिए 150 घरों का निर्माण करवा चुकी हैं। ये बेहद ही सराहनीय कार्य है।

कई लोग जमीन कर देते हैं दान

बता दें कि इस नेक काम से अनेकों बच्चों को मदद मिली है। इस घर की कीमत करीब 6 से 10 लाख रूपये है। ANI से बातचीत के दौरान लिस्सी ने बताया कि वे समाज को बेघर मुक्त बनाना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि कई लोग इस नेक काम के लिए जमीन भी दान कर रहे हैं। इन घरों के लिए सबसे पहले महिलाओं, विधवाओं, बच्चों, बीमार सदस्यों वाले बेघर परिवार को प्राथमिकता दी जाती है।

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