धर्मेंद्र बोले, शोले के लिए मैं अपने संवाद खुद लिखता था

नई दिल्ली: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र ने अपने जीवन और फ़िल्मी करियर को लेकर कई रोचक बातें बताई हैं। उन्होंने बताया कि शोले के लिए अपने कई संवाद उन्होंने खुद लिखे थे। शोले में ‘मौसीजी’ की लाइन उन्होंने खुद लिखी। शोले के सारे संवाद सलीम-जावेद ने नहीं लिखे थे। धर्मेंद्र ने कहा, रोमांस इमोशनल चीज हो जाती है, लेकिन कॉमेडी मुश्किल है। टाइमिंग सही नहीं हो तो इसमें सब गलत हो जाता है। महमूद को मैं कहता था बचकर रहना। महमूद के साथ काम करने से हीरो झिझकते थे, क्योंकि कॉमेडी में बहुत कुछ अंदर से आता है।

उन्होंने कहा, सितारे आज पैसों के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। फिल्म इंडस्ट्री के मौजूदा हालात पर धर्मेंद्र ने चिंता जताई। उन्होंने कहा, अब यह इंडस्ट्री नहीं रही, मंडी बन गई है। पैसों के लिए किसी से कुछ भी करवा लो। देव आनंद में जो था, वह किसी में नहीं है। अब लोग कहीं भी नाचने-गाने चले जाते हैं। धर्मेंद्र ने कहा, मेरे लिए दिलीप कुमार प्रेरणा थे और मधुबाला उससे भी ज्यादा। धर्मेंद्र ने बताया कि वह बॉलीवुड में पैसे कमाने नहीं आए थे। उन्होंने कहा, मैं लोगों के दिलों में जगह बनाना चाहता था।

लोग मुझे अपना दोस्त समझते हैं, इसे देखकर मुझे खुशी होती है। मैं अपनी मिट्टी को नहीं भूला हूं। मुझे अपने लोगों से मोहब्बत है। धर्मेंद्र ने कहा, आज मैं सोचता हूं कि मुझमें भी कोई बात थी, तभी लोगों ने मुझे पसंद किया। उन्होंने कहा, फिल्म इंडस्ट्री में अवॉर्ड लेने के लिए आपको शातिर होना पड़ता है। कई हिट फिल्में देने के बावजूद मुझे कभी बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड नहीं मिला।

हालांकि फिल्मफेयर स्टार टैलेंट अवॉर्ड मिला था और बेस्ट एक्टर के लिए नॉमिनेट किया गया था। उन्होंने कहा कि मैं अवॉर्ड लेने गया था, क्योंकि कहा गया था कि दिलीप कुमार मुझे अवॉर्ड देंगे। मैं दिलीप साहब के लिए वहां गया था। इस इंडस्ट्री में आपको अवॉर्ड लेना आना चाहिए। मुझ में वह शातिरपन और खूबी नहीं थी। लोग अवॉर्ड पाने के लिए ओछे हथियार का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए मेरे फैंस ही सब कुछ हैं। मुझे अवॉर्ड्स से कोई मतलब नहीं।

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