धर्म-जाति का जहर घोल सत्ता में आयी भाजपा

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी जातिवादी पार्टी है। विकास से ही देश व लोकतंत्र मजबूत होगा लेकिन भाजपा धर्म व जाति का जहर घोलकर सत्ता में आयी है। जनता भाजपा को समझ चुकी है और आने वाले समय में जनता दोनों सरकारों को देखेगी।

यादव एक होटल में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी का नाम लिये बगैर उन पर जातिवादी होने का आरोप लगाया और कहा कि इस इल्जाम से बचने के लिये वह उन पर परिवारवाद और जातिवाद का आरोप लगाते रहते हैं। हम चाहते हैं कि विपक्ष एकजुट हो, ताकि भाजपा से मुकाबला दिलचस्प हो। उन्होंने कहा कि ईवीएम के मुद्दे पर उन्होंने शनिवार को बैठक बुलायी थी। बैठक में विपक्षी दलों के प्रदेश अध्यक्षों को बुलाया गया था।

सबकी इच्छा थी कि गोरखपुर व फूलपुर लोस सीट के उपचुनाव में ईवीएम का प्रयोग न किया जाये। मतपत्रों के जरिये उपचुनाव हों। इसे आजमाने में हर्ज ही क्या है। विकास से भाजपा का कोई लेना देना नहीं है। रंग बदलने से विकास थोड़े ही होता है। उन्होंने कहा कि सपा को राष्ट्रीय पार्टी बनाने के लिये वह संघर्ष जारी रखेंगे। इसके लिए यदि कोई यात्रा करनी पड़े, तो करूंगा।

इसके अलावा अखिलेश यादव ने ठंड से मरने वालों के आश्रितों को पांच लाख रुपये राहत राशि देने की मांग करते हुए कहा है कि जो सरकार बच्चों को स्वेटर नहीं बांट पा रही है, वह विकास के दूसरे काम क्या करेगी।श्री यादव ने पत्रकारों से कहा कि भाजपा दावा करती है कि उसके करोड़ों सदस्य हैं। यदि एक सदस्य एक स्वेटर देता, तो सभी बच्चों को स्वेटर मिल जाता। बच्चों का खाना रोककर स्वेटर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पेंशन ही दे दी जाये, तो मां अपने बच्चों के लिए स्वेटर खरीद लेती लेकिन योगी ने मुख्यमंत्री पद संभालते ही समाजवादी पेंशन बंद कर दी।

उन्होंने कहा कि ‘‘नेताजी’ ( मुलायम सिंह यादव) जहां से भी चुनाव लड़ना चाहेंगे, लड़ाया जाएगा और मेरे साथ सभी समाजवादी प्रचार करने जाएंगे। उन्होंने लखनऊ के अतिविशिष्ट इलाकों में आलू फेंके जाने को सरकार की गलत नीतियों का परिणाम बताते हुए कहा कि यदि इसे खरीद लिया गया होता, तो किसान क्यों फेंकते। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार हर मुद्दे पर फेल है। पहले यह बताने की कोशिश की गयी कि आलू फेंका नहीं गया बल्कि किसी वाहन से गिरगया है लेकिन सचाई सामने आने पर सरकार कुछ बोलने की स्थिति में नहीं रह गयी है।

किसानों से संबंधित नीतियों को ठीक करने के बजाय आलू फेंके जाने के मामले में पुलिस विभाग के चार लोगों को निलम्बित कर दिया गया। क्या इससे आलू किसान संतुष्ट हो जाएंगे। किसी को निलम्बित करने के बजाय सकारात्मक कदम उठाते हुए आलू खरीद की व्यवस्था की जानी चाहिए।

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